पटना। ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के बैनर तले बिहार के पीएच.डी. धारकों एवं शोधार्थियों ने अपनी मांगों को लेकर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लोकभवन मार्च निकाला। प्रदर्शन में पीएचडी धारकों, शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। मार्च की शुरुआत वीर कुंवर सिंह आजादी पार्क से हुई, जहां प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे पीएच.डी. धारक एवं शोधार्थी बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। आंदोलनकारियों ने हाथों में अपनी मांगों से संबंधित तख्तियां और पोस्टर लेकर लोकभवन की ओर कूच किया।
पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को लोकभवन ले जाकर वार्ता कराई गई
प्रदर्शनकारियों को लोकभवन की ओर आगे बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन द्वारा हड़ताली मोड़ के पास बैरिकेडिंग की गई। बैरिकेडिंग के बावजूद आंदोलनकारी शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। काफी देर तक प्रदर्शन जारी रहा। प्रशासन की पहल पर आंदोलनकारियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को लोकभवन ले जाकर वार्ता कराई गई। प्रतिनिधिमंडल ने पीएच.डी. धारकों एवं शोधार्थियों की विभिन्न मांगों, नियुक्ति प्रक्रिया में व्याप्त विसंगतियों तथा शोधार्थियों के भविष्य से जुड़े विषयों को मजबूती से रखा और सरकार से शीघ्र ठोस निर्णय लेने की मांग की।
कुमुद पटेल के पहुंचते ही आंदोलनकारियों में आया नया जोश
लोकभवन मार्च के दौरान आंदोलन का सबसे भावुक और उत्साहपूर्ण क्षण उस समय देखने को मिला, जब एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक एवं आंदोलनकारी नेता कुमुद पटेल, जो पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं, प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही हजारों की संख्या में मौजूद पीएच.डी. धारकों एवं शोधार्थियों में नया उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक पीएच.डी. धारकों एवं शोधार्थियों की न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। लोकभवन मार्च में डॉ. मोनू यादव, नितेश पटेल, अजीत पटेल, राजकुमार पासवान, शंभू देवा, डॉ. श्वेता शरण, डॉ. विभा रानी, डॉ. कुंदन, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. राधेश्याम, बीकू सिंह प्रधान, भीम यादव, रजनीश कुमार, आशीष यादव सहित बड़ी संख्या में पीएच.डी. धारक, शोधार्थी एवं समर्थक प्रमुख रूप से शामिल हुए।