– By Bhola Nath
‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादक
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खास खबर : तीसरी कड़ी…
पटना : यह एक बड़ा सवाल है…? क्या राज्य के सभी मेडिकल कालेजों खास प्राइवेट को अपने यहां शिक्षकों/फेकल्टी और स्टाफ को सुबह 9 से शाम पांच बजे तक की उपस्थिति अनिवार्य करने के लिए बाध्य किया जा सकता है…? जवाब है…! जी, हां…यह बिल्कुल संभव है…! बस, बिहार सरकार की नीयत होनी चाहिए…!! सभी जानते हैं…एक समय सूबे के स्कूलों में शिक्षकों की क्या उपस्थिति होती थी। अधिकांश गायब रहते थे…!! कई उपाय हुए पर नतीजा ढाक के तीन पात…! उसी दौरान वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डा. एस सिद्धार्थ विभाग ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) की कमान संभाली। आते ही, उन्होंने ई-शिक्षा कोष पोर्टल अमल में लाया। डा. सिद्धार्थ ने इसके जरिए स्कूलों के लगभग 8 लाख शिक्षकों फेशियल बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के आधार पर अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज करने का आदेश दिया। पिछली कड़ी में हमने जिक्र किया है कि किस तरह शुरू में कुछ गुरुजी ने इसका गलत किया…! लेकिन, जल्द मामला पकड़ में आ गया और उन पर कार्रवाई हुई। इस व्यवस्था के कारण अब कोई शिक्षक स्कूल से भांजी नहीं मारता…!! लाखों मरीजों की जान और हजारों एमबीबीएस छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर सवाल पर BRBJ News ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डा. एस सिद्धार्थ से बात की। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि स्कूलों में लागू नया अटेंडेंस सिस्टम मेडकिल कालेजों में भी मामूली फेरबदल से लागू किया जा सकता है…! इसे अमल में लाना पूर्णत: संभव है…??
मेडिकल कालेजों में फेशियल रिकॉग्निशन की मॉनिटरिंग बिहार सरकार खुद करे…

क्या ऐसा नहीं हो सकता कि आधार बेस्ड फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (आबास) की जिस व्यवस्था से दिल्ली से नेशनल मेडिकल कौंसिल (एनएमसी) निजी मेडिकल कालेजों में मॉनिटरिंग कर रहा है…वही व्यवस्था बिहार सरकार खुद यहां के सरकारी और निजी दोनों तरह के मेडिकल कालेजों में चिकित्सक शिक्षकों/फेकल्टी और अन्य स्टाफ की उपस्थिति के लिए अनिवार्य कर दे और इसकी मॉनिटरिंग स्वास्थ्य विभाग खुद करे। …BRBJ News की इस खास खबर की पिछली 2 कड़ियों में हमने पढ़ा कि अधिकांश निजी मेडिकल कालेजों में शिक्षकों/फेकल्टी की उपस्थिति का जो आलम है, उससे साफ है कि नई दिल्ली से एनएमसी के माध्यम से इसकी सही निगरानी संभवत: नहीं हो पा रही है…!! लेकिन, राज्य सरकार चाहे तो इसे अपने स्तर से अमल में ला सकती है।
हर रोज तीन दफा उपस्थिति दर्ज कराने का आदेश जारी हो….
जरा सोचिए, यदि किसी निजी मेडिकल कालेज के शिक्षक / फेकल्टी के लिए हर रोज सुबह, दोपहर और शाम यानी तीन बार उपस्थिति दर्ज करने का आदेश दे दिया जाए तो…!! फिर किसी शिक्षक या फेकल्टी को अनुपस्थित रहने के लिए काफी जतन लगाना पड़ेगा…! यदि सुबह की अटेंडेंस बनाने के बाद वे कालेज से गायब हो भी जाते हैं, तो उनको दोपहर में हाजिरी बजाने पुन: कालेज आना होगा। फिर दोपहर बाद बाहर चले गए तो शाम को फिर उपस्थिति दर्ज करने आना होगा। इस तरह कोई फेकल्टी, डाक्टर या स्टाफ आखिर कितनी बार कालेज में आना-जाना करेगा। ऐसे में चिकित्सक शिक्षक/फेकल्टी व स्टाफ को 9 से 5 तक ड्यूटी पर रहने की बाध्यता होगी। स्वास्थ्य विभाग चाहे तो अपने प्रशासनिक तंत्र से हफ्ते में कम से कम दो बार औचक निरीक्षण के माध्यम से इसकी जांच भी करा सकता है।
स्कूली और निजी मेडिकल शिक्षकों में थोड़ा अंतर, इसीलिए नियमित निगरानी जरूरी…
हालांकि, यहां स्कूली शिक्षकों और मेडिकल शिक्षकों में थोड़ा अंतर है। स्कूल के शिक्षक अपनी अनिच्छा से स्कूल से गायब हो जाते थे। जबकि, अधिकतर निजी मेडिकल कालेजों में प्रबंधन और शिक्षक दोनों हर रोज सबकी उपस्थिति नहीं चाहते…!! जानकारों के मुताबिक फेकल्टी, शिक्षक, डाक्टर और स्टाफ के लिए निर्धारित पूरी क्षमता के हिसाब से उनको ऐंगेज करने पर प्रबंधन को भारी भरकम राशि खर्च करनी होगी। वहीं, डाक्टर, शिक्षक या फेकल्टी कभी-कभी कालेज जाने या नहीं जाने और कागज पर ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराना बेहतर समझते हैं। कारण कि इसके जरिए वे पसंदीदा जगह पर अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस चमकाते रहते हैं। इससे उनको अधिक आर्थिक लाभ हो जाता है…!! यही कारण है कि मेडिकल कालेजों, खासकर निजी में आधार बेस्ड फेशियल रिकॉग्निशन (बायोमेट्रिक आधारित) सिस्टम लागू करने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपने स्थानीय प्रशासनिक तंत्र से नियमित मॉनिटरिंग कराना जरूरी हो जाता है। आखिर लाखों मरीजों की जान और हजारों मिडिकल छात्रों के भविष्य का सवाल है। सेहत महकमा चाहे तो इसके लिए विभाग में ही एक अलहदा निगरानी सेल बना सकता है, जिसके पास आबास के साथ ही सभी मेडिकल कालेजों में लगे सीसीटीवी का भी एक्सेस हो और सिस्टम के जानकार/विशेषज्ञ इस पर कड़ी नजर रखें…!!
नियमित औचक निरीक्षण से सूचना लीक होने की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी…
जिला प्रशासन से निजी मेडिकल कालजों की नियमित औचक निरीक्षण होने से सूचना लीक होने की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी। अभी यह देखा जाता है कि एनएमसी के किसी निजी मेडिकल कालेजों के औचक निरीक्षण की सूचना अक्सर लीक हो जाती है। अब यह जानकारी कैसे लीक होती है, यह एनएमसी और सिस्टम के लिए शोध का विषय है। वरना, क्या कारण कि आनन-फानन में उस मेडिकल कालेज की व्यवस्था चाक-चौबंद हो जाती है। अधिकांश निजी मेडिकल कालेज जो अमूमन 20 से 30 फीसदी शिक्षक/स्टाफ के स्ट्रेंथ से चलते हैं, वहां अचानक 90 तक फीसदी की उपस्थिति कैसे दर्ज हो जाती है। इंस्पेक्शन के लीक होने की बात से एमसीआई के पूर्व चेयरमैन डा. अजय कुमार भी इत्तेफाक रखते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा भी था कि निजी कालेजों के दलाल हमेशा सक्रिय रहते हैं, इंस्पेक्शन का डेट पता कर वे इसकी सूचना कालेज प्रबंधन तक पहुंचा देते हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे व्यक्ति और एजेंसियां भी इस फील्ड में उतर गई हैं, जो ठीक ठाक रकम लेकर किसी कालेज का तमाम झोलझाल हटाकर सारा डाटा ऑन पेपर दुरुस्त कर देती हैं। हालांकि, सरकार गहराई से पड़ताल करा देगी तो इसका भी भांडा बुलबुले की तरह फूट जाएगा…!!
क्या कहते हैं डा. एस सिद्धार्थ…
इस बाबत हमने काफी वरिष्ठ आईएस अधिकारी और बिहार सरकार में शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव (एसीएस) रह चुके डा. एस सिद्धार्थ से भी बात की। BRBJ News के पूछे जाने पर डा. सिद्धार्थ ने बताया कि स्कूलों में इस्तेमाल हो रहे अटेंडेंस का मौजूदा सिस्टम सूबे के मेडिकल कालेजों में भी लागू किया जा सकता है…बशर्ते, राज्य सरकार में इच्छाशक्ति होनी चाहिए। शिक्षा विभाग का एसीएस रहने के दौरान मैंने ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर फेशियल बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने का आदेश दिया था। इसके माध्यम से 8 लाख शिक्षक हर कार्यदिवस पर दो दफा यानी एक दिन में 16 लाख हाजिरी अपलोड करते हैं। सूबे के स्कूलों में उपस्थिति सुनिश्चित करने का यह प्रयोग सौ-फीसदी सफल रहा है। जिस सिस्टम से स्कूलों में 8 लाख शिक्षकों की दो बार हाजिरी लग रही है, उसीसे मेडिकल कालेजों के शिक्षकों की उपस्थिति क्यों नहीं दर्ज करवाई जा सकती…!! हालांकि इसमें मामली फेरबदल की दरकार होगी। इसके तहत स्कूलों में लागू फेशियल बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की जगह फेशियल रिकाग्निशन बेस्ड बायोमेट्रिक सिस्टम अमल में लाया जा सकता है। इसमें बहुत माथापच्ची की जरूरत नहीं है। एक मेडिकल कालेज में कितने शिक्षक / फेकल्टी या पारामेडिकल आदि स्टाफ होंगे…? बहुत हद तो 400…!! राज्यभर के सरकारी और प्राइवेट मिलाकर 30-32 मेडिकल कालेज हैं। इस लिहाज से सब मिलाकर 12-13 हजार शिक्षक/स्टाफ आदि होंगे। चूंकि यह संख्या स्कूलों के 8 लाख शिक्षक की तुलना में काफी कम है…इसलिए मेडिकल कालेजों में फेशियल रिकाग्निशन बेस्ड बायोमेट्रिक सिस्टम लागू कराया जा सकता है…!!!