By Bhola Nath
‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादक
संपर्क : 9431044800 (मोबाइल नम्बर)
विशेष स्टोरी : तीसरी किस्त
जानिए…देश के सबसे बड़े अस्पताल की कुछ और रियलिटी चेक…!!
पटना : स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार जी…! पीएमसीएम आने वाले पेशेंट आप से अपने पिता के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर जरा मुलाहज़ा फरमाने का आग्रह कर रहे हैं…!! यहां के इन अत्याधुनिक प्राइवेट रूमों और डीलक्स सुईट का जब कोई उपयोग ही नहीं हो रहा है, मरीजों और उनके परिजनों को इसका लाभ ही नहीं मिल रहा है, तो 100 क़रोड़ से अधिक खर्च करके इनको बनाया क्यों गया था…!!! क्या यह जनता की गाढ़ी कमाई के धन का बेजा इस्तेमाल नहीं है…राज्य के सरकारी खजाने का दुरुपयोग नहीं है…!!! जरा गौर कीजिए, यह आपके विभाग की लापरवाही है या फिर निजी हॉस्पिटल्स के दबाव की साजिश…!!!!

प्राइवेट रूम ….
पीएमसीएम की नई बिल्डिंग की हकीकत और फसाना में और बड़ा गैप…
पटना मेडिकल कालेज एवं अस्पताल यानी पीएमसीएम विश्व के दूसरा सबसे बड़े और भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित अस्पताल का तमगा हासिल करने जा रहा है। लेकिन, इसकी नई बिल्डिंग की हकीकत और फसाना…में एक और बड़ा गैप नमूदार हो रहा है। उन्हीं में एक है-इसके प्राइवेट रूम्स और डीलक्स सुईट्स की कहानी। जिस ट्विन टावर में ये प्राइवेट रूम्स और डीलक्स सुईट्स हैं, उसे पीएमसीएम प्रशासन को हैंडओवर हुए एक साल से अधिक समय बीत गए हैं, मगर आज तक इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री की हैसियत से नीतीश कुमार ने गत 3 मई, 2025 को पीएमसीएच की जिन नई सुविधाओं का दूसरी बार में लोकार्पण किया था, उनमें ये सभी भी थे। उनके साथ तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद थे, जो अभी बिहार के मुख्यमंत्री हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के रूप में प्रत्यय अमृत (मौजूदा मुख्य सचिव) भी थे।

डीलक्स सुईट …
क्या निजी अस्पतालों के दबाव में नहीं चालू हो रहे प्राइवेट रूम व डीलक्स सुईट…
अभी पीएमसीएम में आईसीयू बेड वाले 44 प्राइवेट रूम और 10 डीलक्स सुईट्स तैयार हैं। प्राइवेट रूम सिंगल, जबकि डीलक्स सुईट डबल रूम के हैं। इनमें, दो सुपर डीलक्स रूम भी हैं। इस तरह के आईसीयू बेड के साथ कुल 146 प्राइवेट रूम पहले फेज में बनने हैं। किराए की बात करें तो एक डीलक्स सुईट के 4000 रुपए और प्रति प्राइवेट रूम 1500 रुपए है। वहीं, प्राइवेट हॉस्पिटल्स में इस तरह के डीलक्स सुईट का किराया कम से कम तीन गुना यानी 12 से 15 हजार और प्राइवेट सिंगल रूम के 5 से 6 हजार रुपए हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सभी तरह के मिलाकर ये 56 प्राइवेट रूम/सूट पिछले एक साल यानी सितम्बर, 2025 से ही तैयार हैं, मगर अभी तक ये चालू नहीं हुए हैं। काफी कोशिशों के बाद भी वीआईपी मरीजों को भी यह सुविधा नहीं मिल रही है। क्या इसे प्राइवेट अस्पतालों का दबाव माना जाए? कारण कि इस सुविधा के फंक्शनल नहीं होने से कई वैसे मरीज जिनको इस सुविधा की दरकार रहती है और अफोर्ड कर सकते हैं, वे सिर्फ इसी वजह से निजी नर्सिंग होम या अस्पतालों का रुख कर लेते हैं। दूसरी ओर, इस कारण पीएमसीएम या कहें सरकार को भी राजस्व की क्षति हो रही है।
लोगों की इच्छा…मंत्री निशांत कुमार कारणों की पड़ताल करें…
लोगों की इच्छा है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को इसके कारणों की पड़ताल करनी चाहिए, कि ऐसा क्यों हो रहा है। वह सुधार के प्रयास भी कर रहे हैं। दो दिन पहले गत शुक्रवार को निशांत कुमार का बयान आया था कि पीएमसीएम और राज्य के अन्य बड़े अस्पतालों में संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। …तो क्या इन प्राइवेट रूम्स और डीलक्स सुईट्स का बनने के बाद भी यू ही पड़े रहना, संसाधनों का अपव्यय या कहें तो दुरुपयोग नहीं है। वह भी तब जबकि यह उनके पिता नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी और स्वप्न परियोजना है।
पुराने बिल्डिंग में चल रहे आईसीयू बेड पर भी उठ रहे सवाल…
इसी तरह ‘पीएमसीएच के पुनर्निर्माण की हकीकत और फसाना…’ की दूसरी कड़ी में हमने लिखा था कि नई इमारत में बनकर तैयार पड़े 54-55 आईसीयू बेड अभी चालू ही नहीं हुए हैं। इसका कारण क्या है, कोई बताने को तैयार नहीं है। जबकि इन पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं। परिणाम यह है कि मेडिसिन और सर्जरी के 18-18, न्यूरो सर्जरी के 12 और कुछ अन्य आईसीयू बेड पुराने बिल्डिंग में ही चल रहे हैं। इस कारण पुराने आईसीयू ब्लाक को तोड़ा नहीं जा पा रहा है और नई सुविधाओं के निर्माण में खासी परेशानी पेश आ रही है। क्या इसे लेकर भी हेल्थ माफिया का दबाव है? ऐसे कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
फैक्ट चेक : इसी ‘दूसरी कड़ी’ यह जिक्र भी आया था कि अत्याधुनिक तकनीक से लैस 65 आईसीयू बेड में से 10-11 बेड डा. आईएस ठाकुर (पूर्व अधीक्षक, पीएमसीएम) ने प्रयास करके गाइनी विभाग को सौंपा था। वहां ये चल अभी भी रहे हैं। यहां स्पष्ट करना है कि गाइनी के इन आईसीयू बेडों को दरअसल पीएमसीएम के मौजूदा अधीक्षक डा. राजीव कुमार सिंह ने अपनी देख-रेख में चालू कराया है। वैसे सूत्रों के मुताबिक मरीजों की सुविधा के लिए प्राइवेट और डीलक्स रूम डा. आईएस ठाकुर ने ही प्रयास करके प्रोजेक्ट में शामिल कराया था।