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ए भाई…! ई तऽ गजब्बेऽ पढ़ाई बाऽऽ…! एगो लइका से एक-डेढ़ करोड़ टान लऽ…! ऊ पढ़े आऽ कि ना पढ़े…बस डिग्री थमा दऽ…! अब जा बउआ…तहरा गर्दन में आला लटकावे के लाइसेंस मिल गइलऽ…! बबुआऽ के कछु आवेऽ चाहे ना आवेऽ कालेज के त कमाई हो गइल नुऽऽ…!! बिहार के निजी मेडिकल कालेजों और वहां से एमबीबीएस कोर्स करने वाले स्टूडेंट के बारे में कुछ ऐसी ही धारणा बन रही है लोगों में…!! बिहार में अभी डेढ़ दर्जन प्राइवेट मेडिकल कालेजों में MBBS की लगभग 2500 सीटें हैं…!! सीटों के हिसाब से करोड़ या डेढ़ करोड़ से गुना कर लें…जितने छात्र, मेडिकल कालेजों के उतने करोड़ रुपए खरे…!!

क्या हो…जब आरोग्य मंदिर ही ‘खाला का घर’ बन जाएं…! फिर वहां से निकले धरती के दूसरे भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर साहब कैसे होंगे…! कुछ यही हाल बिहार के मेडिकल कॉलेजों खासकर निजी का है…! जहां अधिकतर में प्रबंधन की मनमानी चल रही है… ! एनएमसी के मानकों की कसौटी पर कसें तो इनमें गुरुजी के साथ ही, नर्सिंग व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की भी घनघोर किल्लत है…! तुर्रा यह कि किसी लेबल पर कहीं कोई जांच नहीं…!! लोगों का यहां के मेडिकल कालेजों, खासकर निजी पर से लोगों का भरोसा उठ रहा है और वे इलाज के लिए या तो पटना बड़े निजी अस्पताल या फिर, दिल्ली, मुम्बई का रुख कर रहे हैं…!!

सावधान…! यदि सि‌र्फ MBBS डाक्टर होने के आधार पर आप किसी से चिकित्सकीय सलाह लेने या इलाज कराने जा रहे हैं… तो जरा रुकिए…!! नीट पीजी-2026 की परीक्षा में 256 डाक्टरों को जीरो यानी शून्य अंक आए हैं…वहीं, करीब आधे डॉक्टर जनरल कटऑफ भी पार नहीं कर पाए…!! हम अक्सर झोलाछाप डॉक्टर, ‘Quack’ या फिर ‘नीम हकीम’ को अलग नजर से देखते हैं…मगर, नीट पीजी के नतीजों को देखें तो लगेगा कि अगर किसी के पास डाक्टर की वैध डिग्री भी है तो क्या उसका लाभ मरीजों को वाकई मिलेगा…!!!

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BRBJ News > ओपीनियन > मुद्दा > ए भाई…! ई तऽ गजब्बेऽ पढ़ाई बाऽऽ…! एगो लइका से एक-डेढ़ करोड़ टान लऽ…! ऊ पढ़े आऽ कि ना पढ़े…बस डिग्री थमा दऽ…! अब जा बउआ…तहरा गर्दन में आला लटकावे के लाइसेंस मिल गइलऽ…! बबुआऽ के कछु आवेऽ चाहे ना आवेऽ कालेज के त कमाई हो गइल नुऽऽ…!! बिहार के निजी मेडिकल कालेजों और वहां से एमबीबीएस कोर्स करने वाले स्टूडेंट के बारे में कुछ ऐसी ही धारणा बन रही है लोगों में…!! बिहार में अभी डेढ़ दर्जन प्राइवेट मेडिकल कालेजों में MBBS की लगभग 2500 सीटें हैं…!! सीटों के हिसाब से करोड़ या डेढ़ करोड़ से गुना कर लें…जितने छात्र, मेडिकल कालेजों के उतने करोड़ रुपए खरे…!!
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ए भाई…! ई तऽ गजब्बेऽ पढ़ाई बाऽऽ…! एगो लइका से एक-डेढ़ करोड़ टान लऽ…! ऊ पढ़े आऽ कि ना पढ़े…बस डिग्री थमा दऽ…! अब जा बउआ…तहरा गर्दन में आला लटकावे के लाइसेंस मिल गइलऽ…! बबुआऽ के कछु आवेऽ चाहे ना आवेऽ कालेज के त कमाई हो गइल नुऽऽ…!! बिहार के निजी मेडिकल कालेजों और वहां से एमबीबीएस कोर्स करने वाले स्टूडेंट के बारे में कुछ ऐसी ही धारणा बन रही है लोगों में…!! बिहार में अभी डेढ़ दर्जन प्राइवेट मेडिकल कालेजों में MBBS की लगभग 2500 सीटें हैं…!! सीटों के हिसाब से करोड़ या डेढ़ करोड़ से गुना कर लें…जितने छात्र, मेडिकल कालेजों के उतने करोड़ रुपए खरे…!!

By BRBJ Desk
Published: October 6, 2026
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– By Bhola Nath

‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादक

संपर्क नम्बर : 9431044800 (मोबाइल)

खास खबर : छठवीं और अंतिम कड़ी… (पर समाप्त नहीं…फिलहाल स्थगित…!!)

पटना : ए भाई…! ई तऽ गजब्बेऽ पढ़ाई बाऽऽ…! एगो लइका से एक-डेढ़ करोड़ टान लऽ…! ऊ पढ़े आऽ कि ना पढ़े…बस डिग्री थमा दऽ…! अब जा बउआ…तहरा गर्दन में आला लटकावे के लाइसेंस मिल गइलऽ…! बबुआऽ के कछु आवेऽ चाहे ना आवेऽ कालेज के त कमाई हो गइल नुऽऽ…!! बिहार के निजी मेडिकल कालेजों और वहां से एमबीबीएस कोर्स करने वाले स्टूडेंट के बारे में कुछ ऐसी ही धारणा बन रही है जानकार लोगों में…!! यहां के डेढ़ दर्जन प्राइवेट कालेजों में MBBS की लगभग 2500 सीटें हैं…!! सीटों के हिसाब से करोड़ या डेढ़ करोड़ से गुना कर लें…जितने छात्र, मेडिकल कालेजों के उतने करोड़ रुपए खरे…!! मेडिकल कालेजों पर इस विशेष खबर की अंतिम और छठवीं कड़ी में हम एकबार फिर नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी), बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग या फिर केन्द्र सरकार की एजेंसी – सीबीआई से निष्पक्ष जांच की गुहार लगाते हैं, ताकि हजारों छात्रों, लाखों मरीजों और जनहित में सच्चाई सामने आ सके…! …ताकि, नियमों को ठेंगे पर रखकर बिहार के अधिकतर प्राइवेट मेडिकल कालेज महज नोट छापने का संस्थान न बन कर रह जाएं…!

What's inside ?
– By Bhola Nath‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादकसंपर्क नम्बर : 9431044800 (मोबाइल)खास खबर : छठवीं और अंतिम कड़ी… (पर समाप्त नहीं…फिलहाल स्थगित…!!)कमाई तगड़ी चोखी…! इसलिए पैसे वाले अब मेडिकल कालेजों में लगा रहे पूंजी…लास्ट में बची एक-एक एमबीबीएस सीट की लगती है लाखों की बोली…दूसरे राज्यों से बिहार पढ़ने आ रहे छात्र, मकसद बस डिग्री पाना….सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, प्राइवेट अस्पताल उद्योगों की तरह मुनाफा कमा रहे…साभार…‘हिन्दुस्तान’छात्रों की भी पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं रही, बंक मारते हैं…बिहार में निजी 19 और 13 सरकारी मेडिकल कालेज, लगभग 4500 सीटें…बिहार के प्राइवेट मेडिकल कालेज और उनमें नामांकन के लिए तय सीटें (कोष्टक में) :बिहार के सरकारी मेडिकल कालेज :समाप्त नहीं…फिलहाल स्थगित…!!

फिलहाल हम मेडिकल कालेजों पर BRBJ News की इस खास खबर की शृंखला का अंत कर भले ही रहे हैं, मगर, इसे अंतिम बिल्कुल नहीं समझें…! यह बस स्थगन या विराम मात्र है…! हम आपको भरोसा दिलाते हैं कि जब भी मेडिकल कालेजों की बाबत कोई नया अपडेट उजागर होगा…एक नई खबर के साथ BRBJ News आपके समक्ष हाजिर होगा…!! इस खास खबर के दौरान आप सभी के उत्साहवर्द्धन से हम आभारी हैं…आह्लादित हैं…! इस सीरीज के दौरान आप सभी के आए फोन कॉल्स, हौसला आफजाई और सुझावों के लिए आप सभी का बहुत – बहुत धन्यवाद…! कई सुधि पाठकों का यह भी कहना था या कहें चिंता थी कि BRBJ News लिख तो रहा है दो टूक सच्चाई…मगर, क्या इससे मेडिकल कालेजों खासकर प्राइवेट के संचालन में कोई सुधार आएगा…?? हमारा जवाब रहा कि हमें अपने हिस्से का काम करते रहना चाहिए…!! … और हम यह करते रहेंगे…!!

कमाई तगड़ी चोखी…! इसलिए पैसे वाले अब मेडिकल कालेजों में लगा रहे पूंजी…

चौंकिए मत जनाब…! ये बिजनेस है…! एक समय था, जब बिहार में पैसे वाले लोग पेट्रोल पम्प, रियल एस्टेट में पूंजी लगाते थे…! इधर, निजी इंजीनियरिंग कालेजों का धंधा भी मंदा है…! इसलिए अब मेडिकल कालेजों में पैसा लगा रहे हैं…! चूंकि, इसमें कमाई तगड़ी चोखी है…! इसीलिए न सिर्फ बिहार बल्कि देशभर में प्राइवेट मेडिकल कालेजों की बाढ़ आ गई है…! पढ़ाने के लिए सीनियर शिक्षक या फेकल्टी का भले टोटा हो…मेडिकल कालेज रोज उगते जा रहे हैं…! अधिकांश मेडिकल कालेजों में सेवा की भावना आप चिराग लेकर ढूंढ़ते रह जाएंगे…! (मेडिकल कालेजों में शिक्षक/फेकल्टी या अन्य स्टाफ, साधन और संसाधन के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप BRBJ News की हमारी इस खास खबर की पिछली कड़ियों पर गौर फरमाएं…) प्रबंधन द्वारा नामांकन कराने वाले हर छात्र से कोर्स पूरा करने की अवधि के दौरान एक से डेढ़ करोड़ रुपए की फीस अलग-अलग मद में वसूल ली जाती है। इस तरह कालेज प्रबंधन छात्रों और हॉस्पीटल में इलाज कराने आने वाले मरीजों के इलाज से अलग-अलग यानी दोहरी कमाई करता है…! छात्र पढ़ें या न पढ़ें, उनका पास होना भी तय है…! डिग्री भी मिल जाएगी…! वह भी डाक्टर की…! आगे जानें छात्र… या भुगतें मरीज…!

लास्ट में बची एक-एक एमबीबीएस सीट की लगती है लाखों की बोली…

आपको जरूरी डाक्टरी ज्ञान हो या ना हो…तजुर्बा हो या ना हो…! यह भी संभव है कि जिसे आप क्वैक, नीमहकीम या झोलाछाप डाक्टर के नाम से बुलाते है, उसका तजुर्बा ऐसे अधिकांश कालेजों से निकले डाक्टर बाबू से अधिक हो…(जानिए इस खबर की पिछली कड़ियों में) …! मेडिकल कालेजों में पढ़ाई के स्तर से कोई मतलब नहीं है…! अभिभावक उनमें अपने लड़कों का एडमिशन कराने के लिए के लिए नोटों का बंडल लेकर खड़े रहते हैं…! अजी…! मारामारी रहती है…एडवांस बुकिंग चलती है…! ऐसे ही एक निजी कालेज के सर्वेसर्वा को एक बार अपना ’दिव्यज्ञान’ उड़ेलने की उत्कंठा जागी… तो उन्होंने बताया…हमारे यहां यदि राशि जमाकर एक साल पहले बुकिंग करा लिए, तो छात्र के लिए सीट रिजर्व रख ली जाती है यानी उनका नामांकन तय फीस पर होगा…वरना सेशन के समय आइएगा तो डाक चलेगी…! बची सीटों के हिसाब से बोली लगती है, जो प्रति सीट के लिए अतिरिक्त 50-60 लाख रुपए या इससे अधिक तक भी जा सकती है…!

दूसरे राज्यों से बिहार पढ़ने आ रहे छात्र, मकसद बस डिग्री पाना….

यह भी गौर करने लायक है कि बिहार के कुछ प्राइवेट कालेजों में पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर आदि दूसरे राज्यों के अधिक छात्र पढ़ने आ रहे हैं। नेपाल से भी…! ऐसा नहीं है कि इनमें सभी को एमबीबीएस की पढ़ाई सीरियसली करनी है। ज्यादातर का मकसद सिर्फ इतना है कि किसी तरह डाक्टरी का सर्टिफिकेट ले लो और फिर अपना कोई अस्पताल या नर्सींग होम खोल लो। कइयों को तो सिर्फ इससे मतलब होता है कि घर में कोई डाक्टरी का तमगा लिए शख्स तो है। इनको इलाज से कोई मतलब नहीं होता। मकसद सिर्फ पैसा कमाना है। दवा से अलग… इलाज से अलग…! अभिभावक अपने लड़के को डाक्टरी की डिग्री दिलाने के लिए लालायित रहते हैं। वे जानते हैं कि यह एक इंवेस्टमेंट है, जिसकी कई गुना भरपाई वे कर सकते हैं…! फाइवस्टार कॉरपोरेट कल्चर वाले अस्पताल तो  मरीजों से इलाज के नाम पर जमकर लूट रहे हैं। यह अब सर्वविदित है…! अधिकतर नामचीन निजी अस्पतालों में डाक्टरों को मोटी सैलरी दी जाती है…बदले में उनको हर माह का बिजनेस टारगेट दिया जाता है…! यह टारगेट मरीजों से अनावश्यक महंगी दवा, जांच और आपरेशन के नाम पर पूरा किया जाता है…!

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, प्राइवेट अस्पताल उद्योगों की तरह मुनाफा कमा रहे…

निजी अस्पतालों को लेकर हाल में आई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भी आंखें खोलने वाली है। कुछ दिनों पहले ‘हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित इस खबर का हम साभार यहां जिक्र कर रहे हैं…! इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट अस्पताल उद्योगों की तरह मुनाफा कमा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि निजी अस्पताल मरीजों की सेवा की बजाय मुनाफा कमाने वाले उद्योग की तरह काम करते हैं। शीर्ष कोर्ट ने कैंसर जैसी बीमारियों की दवा पर 10 गुना अधिक दाम वसूले जाने को बर्बरता बताते हुए कहा कि इस पर लगाम जरूनी है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कैसर दवाओं का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी), रिटेलर को मिलने वाले दाम से 16 फीसदी तक तय करने (कैपिंग) के लिए सरकार कानून बनाने पर विचार करने को कहा। जस्टिस नाथ ने कहा कि निजी अस्पताल मरीजों को मजबूर करते हैं कि ये दवाएं वे अस्पताल की फार्मेसी से ही खरीदें। ऐसा न करने पर इलाज की गारंटी न होने की बात कहते हैं। उन्होंने सरकार से इस पर गौर करने को कहा। कैंसर की दवा रिटेलर को 2,700 रुपये में सप्लाई की जाती है. लेकिन उसकी एमआरपी 27,000 रुपये रखी जाती है। शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि कॉर्पोरेट अस्पताल किसी को नहीं छोड़ते। ये तो शव तक को बाहर नहीं ले जाने देते। फार्मा सेक्टर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

साभार…‘हिन्दुस्तान’

 

छात्रों की भी पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं रही, बंक मारते हैं…

वैसे जानकारी के मुताबिक अधिकतर छात्रों की भी पढ़ाई में दिलचस्पी नहीं रही है। यह सिर्फ निजी में ही नहीं, बल्कि सरकारी कालेजों में नामांकन लेने वाले छात्रों के साथ भी है। एक सरकारी कालेज के छात्र का कहना है कि नीट क्वालिफाई करने के लिए तो छात्र जमकर मेहनत करते हैं, मगर एक बार किसी अच्छे सरकारी कालेज में नामांकन हुआ नहीं कि उनमें यह भाव आ जाता है कि अब क्या, अब तो बस पैसा कमाना है। इस तरह वे डाक्टरी की पढाई, जानकारी या तजुर्बे को लेकर लापरवाह हो जाते हैं। यही कारण है कि अच्छे डाक्टर नहीं निकल पा रहे हैं (देखें नीट पीजी-2026 एग्जाम के नतीजों से संबंधित BRBJ News की इस खास खबर की किस्त)…! वहीं, एक बड़े सरकारी कालेज के वरिष्ठ शिक्षक भी बताते हैं कि छात्र अब पढ़ाई को लेकर अटेंटिव नहीं हैं…! अक्सर क्लास में नहीं आते…बंक मार देते हैं…! कई का तो सेंटअप लायक अटेंडेंस भी नहीं होता। लेकिन, यदि उनको परीक्षा देने से रोका जाता है, तो हंगामा शुरू कर देते हैं। शिक्षकों पर ही प्रताड़ित करने के आरोप लगा देते हैं। आंदोलन की धमकी देते हैं…! मरीजों की परेशानी के मद्देनजर सरकार का भी प्राय: रुख नरम रहता है…! इस कारण वरीय शिक्षक/फेकल्टी चाहकर भी छात्रों पर कोई एक्शन नहीं ले पाते। अंतत: उनको MBBS की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे देते हैं…!

बिहार में निजी 19 और 13 सरकारी मेडिकल कालेज, लगभग 4500 सीटें…

नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के मेडिकल एसेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने 14 जुलाई को जारी अपने पत्र में बिहार समेत देश भर के सभी निजी और प्राइवेट मेडिकल कालेजों (इंस्टीट्यूट्स ऑफ नेशनल इम्पोर्टेंस, INIs को छोड़कर) के लिए सीटों की वृद्धि के साथ सूची (क़ुल संख्या समेत) जारी की है। कुछ कालेजों को अपील के बाद उनके लिए सीटें अलॉट कर उतनी संख्या में एमबीबीएस छात्रों के नामांकन की इजाजत दी है। यहां गौरतलब है कि निजी में लगभग 2500 को मिलाकर बिहार में सरकारी समेत सभी मेडिकल कालेजों में लगभग 4500 सीटें हैं…!!

बिहार के प्राइवेट मेडिकल कालेज और उनमें नामांकन के लिए तय सीटें (कोष्टक में) :

  1. माता गुजरी मेडिकल कालेज, किशनगंज (150 था, इस बार 50 बढ़कर 200 हुआ)
  2. कटिहार मेडिकल कालेज, कटिहार (200)
  3. नारायण मेडिकल कालेज एंड हॉस्पीटल, सासाराम (250)
  4. राधा देवी जागेश्वरी मेडिकल कालेज, तुर्की, मुजफ्फरपुर (200)
  5. मधुबनी मेडिकल कालेज, मधुबनी (250)
  6. नेताजी सुभाष मेडिकल कालेज, बिहटा, पटना (150 था, इस बार 100 बढ़कर 250 हुआ)
  7. लॉर्ड बुद्धा कोसी मेडिकल कालेज, सहरसा (150 था, इस बार 50 बढ़कर 200 हुआ)
  8. श्री नारायण मेडिकल इंस्टीट्यूट एंड हास्पिटल, सहरसा (150)
  9. हिमालया मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल, चिक्सी, पटना (150 था, 50 बढ़ा 200 हुआ)
  10. श्यामल चन्द्र शेखर मेडिकल कालेज एंड एसपीएनएम मल्टीस्पेश्यलिटी हॉस्पीटल, खगड़िया (100)
  11. विराट रामायण इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, चकिया, पूर्वी चम्पारण (50 था, 100 बढ़कर 150 हुआ)
  12. महाबोधि मेडिकल कालेज एंड हॉस्पीटल, शेरघाटी, गयाजी (100 था, 50 बढ़कर 150 हुआ)
  13. श्रीनिवास (जी) एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, छपरा (100), नया एस्टैब्लिशमेंट
  14. बुद्धा हास्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, गयाजी (100) नया एस्टैब्लिशमेंट
  15. कुरमा मेडिकल कालेज, जहानाबाद (50)
  16. राम जानकी मेडिकल कालेज, उजियारपुर, समस्तीपुर
  17. ममता मेडिकल कालेज, दरौंदा, सीवान (100)
  18. केके मेडिकल कालेज, राजगीर, नालंदा (100)
  19. गौरी शंकर मेडिकल कालेज, धनरुआ, पटना (मान्यता बाकी)

बिहार के सरकारी मेडिकल कालेज :

  1. पीएमसीएच, पटना (200 था, 50 बढ़कर 250 हुआ)
  2. एनएमसीएच, पटना (150 था, 50 बढ़कर 200 हुआ)
  3. डीएमसीएच, दरभंगा (150)
  4. एएनएमएमसीएच गयाजी (120)
  5. एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर (120 था, 30 बढ़कर 150 हुआ)
  6. जेएनएमसीएच, भागलपुर (120 था 30 बढ़कर 150 हो गया)
  7. भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पावापुरी, नालंदा (120)
  8. आईजीआईएमएस, पटना (150)
  9. गवर्मेंट मेडिकल कालेज, बेतिया (120)
  10. ईएसआईसी मेडिकल कालेज, बिहटा, पटना (100)
  11. गवर्मेंट मेडिकल कालेज, पूर्णिया (100)
  12. जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल, मधेपुरा (100)
  13. एम्स, फुलवारीशरीफ, पटना (125)

समाप्त नहीं…फिलहाल स्थगित…!!

TAGGED:#Medical-college#private#Irregularities#Last#NMC#heslth-deptt#CBI Investigation#Bihar Govt.

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क्या हो…जब आरोग्य मंदिर ही ‘खाला का घर’ बन जाएं…! फिर वहां से निकले धरती के दूसरे भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर साहब कैसे होंगे…! कुछ यही हाल बिहार के मेडिकल कॉलेजों खासकर निजी का है…! जहां अधिकतर में प्रबंधन की मनमानी चल रही है… ! एनएमसी के मानकों की कसौटी पर कसें तो इनमें गुरुजी के साथ ही, नर्सिंग व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की भी घनघोर किल्लत है…! तुर्रा यह कि किसी लेबल पर कहीं कोई जांच नहीं…!! लोगों का यहां के मेडिकल कालेजों, खासकर निजी पर से लोगों का भरोसा उठ रहा है और वे इलाज के लिए या तो पटना बड़े निजी अस्पताल या फिर, दिल्ली, मुम्बई का रुख कर रहे हैं…!!
October 4, 2026
सावधान…! यदि सि‌र्फ MBBS डाक्टर होने के आधार पर आप किसी से चिकित्सकीय सलाह लेने या इलाज कराने जा रहे हैं… तो जरा रुकिए…!! नीट पीजी-2026 की परीक्षा में 256 डाक्टरों को जीरो यानी शून्य अंक आए हैं…वहीं, करीब आधे डॉक्टर जनरल कटऑफ भी पार नहीं कर पाए…!! हम अक्सर झोलाछाप डॉक्टर, ‘Quack’ या फिर ‘नीम हकीम’ को अलग नजर से देखते हैं…मगर, नीट पीजी के नतीजों को देखें तो लगेगा कि अगर किसी के पास डाक्टर की वैध डिग्री भी है तो क्या उसका लाभ मरीजों को वाकई मिलेगा…!!!
October 2, 2026
बड़ा सवाल…? क्या बिहार के मेडिकल कालेजों खासकर प्राइवेट को अपने यहां शिक्षकों/फेकल्टी की सौ-फीसदी उपस्थिति अनिवार्य करने के लिए बाध्य किया जा सकता है…? जवाब…! जी, हां…यह बिल्कुल संभव है…! बस, सरकार की नीयत होनी चाहिए…! लाखों मरीजों और हजारों एमबीबीएस छात्रों से जुड़े इस गंभीर सवाल पर BRBJ News के पूछने पर अपर मुख्य सचिव रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डा. एस सिद्धार्थ बता रहे हैं…यह कैसे संभव है…!!
September 30, 2026
प्रोफेसर साहब शहर में प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे और उसी समय 100-200 किमी दूर किसी मेडिकल कालेज में MBBS छात्रों को चिकित्सा शास्त्र का पाठ भी पढ़ा रहे हैं…! तारीफ यह कि वहां उनकी हाजिरी भी बन रही है…! आखिर क्या है यह पूरा गड़बड़झाला…?, क्या है एनएमसी का नया हाजिरी सिस्टम और कैसे लगाई जा रही उसमें सेंध…!! इस गोरखधंधा के बारे में हम जानेंगे, BRBJ News की इस खास खबर के पार्ट–2 में…!!!
September 29, 2026

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