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क्या हो…जब आरोग्य मंदिर ही ‘खाला का घर’ बन जाएं…! फिर वहां से निकले धरती के दूसरे भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर साहब कैसे होंगे…! कुछ यही हाल बिहार के मेडिकल कॉलेजों खासकर निजी का है…! जहां अधिकतर में प्रबंधन की मनमानी चल रही है… ! एनएमसी के मानकों की कसौटी पर कसें तो इनमें गुरुजी के साथ ही, नर्सिंग व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की भी घनघोर किल्लत है…! तुर्रा यह कि किसी लेबल पर कहीं कोई जांच नहीं…!! लोगों का यहां के मेडिकल कालेजों, खासकर निजी पर से लोगों का भरोसा उठ रहा है और वे इलाज के लिए या तो पटना बड़े निजी अस्पताल या फिर, दिल्ली, मुम्बई का रुख कर रहे हैं…!!