पटना : बिहार के सुरजापुरी मुस्लिम समुदाय के लोगों को जल्द अति पिछड़ा वर्ग में शामिल होंगे। राज्य सरकार इसको लेकर काफी गंभीर है। आज शुक्रवार 24 जुलाई को बिहार विधानसभा में एक गैर सरकारी संकल्प के जरिए यह मुद्दा विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने उठाया। इस पर सरकार की ओर से जवाब देती हुई समान्य प्रशासन विभाग की प्रभारी मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि दोनों आयोगों – पिछड़ा वर्ग कल्याण और अति पिछड़ा वर्ग से इस मुद्दे पर बात हो चुकी है। इनको बीसी से ईबीसी में लाने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इनको ईबीसी की सूची-1 में रखा जाएगा। इनका सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा। तदनुसार आगे की कारर्वाई होगी। गौरतलब है कि बिहार जाति आधारित गणना के अनुसार पूर्णिया प्रमंडल (सीमांचल) के जिले – किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया में इनकी आबादी लगभग 24.5 लाख है।
गैर सरकारी संकल्प के जरिए सदन में उठा मामला
श्री अग्रवाल ने अपने गैर सरकारी संकल्प के जरिए राज्य सरकार से आग्रह किया था कि वह बिहार प्रदेश के सीमांचल के चार जिलों- किशनगंज, अररिया, पूर्णिया एवं कटिहार में बसने वाले आर्थिक एवं शैक्षणिक तौर पर पिछड़े सुरजापुरी मुस्लिम समाज को अत्यंत पिछड़ा वर्ग की सूचि में शामिल करते करते हुये आरक्षण दिया जाए। सदन के समक्ष आज 100 गैर सरकारी संकल्प आए।
सुरजापुरी मुस्लिम समुदाय का आरक्षण का वर्तमान दर्जा
बिहार सरकार ने इन्हें पिछड़ा वर्ग (BC) की सूची में रखा है। समुदाय लंबे समय से यह माँग कर रहा है कि इन्हें और अधिक लाभ देने के लिए अत्यंत पिछड़ा वर्ग या केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल किया जाए ताकि सरकारी नौकरियों में उचित हिस्सेदारी मिल सके।
शिक्षा की कमी, गरीबी, बाढ़ और पलायन
सुरजापुरी मुस्लिम अपनी खास ‘सुरजापुरी’ भाषा और संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। गरीबी और स्कूलों की कमी के कारण इस समाज में पढ़ाई-लिखाई का स्तर बहुत कम है। हर साल आने वाली बाढ़ के कारण यहाँ के लोगों को बहुत आर्थिक नुकसान होता है। काम की तलाश में यहाँ के युवा दूसरे राज्यों में पलायन कर जाते हैं।