पटना : बिहार विधान सभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र शुक्रवार को बेमियादी काल के लिए स्थगित हो गया। अध्यक्ष डा. प्रेम कुमार ने सदन में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि गत 20 जुलाई से शुरू इस सत्र की सबसे खास बात इसमें पारित विधेयकों की संख्या रही। इस सत्र में कुल 21 राजकीय विधेयकों को स्वीकृति मिली। इनमें एक कोछोड़ दें तो 20 विधेयकों को महज दो दिनों (21 और 22 जुलाई को) सदन से पारित किया गया। विनियोग विधेयक के जरिए वर्ष 2026-27 में जो खर्च होने की संभावना है, उसके संबंध में प्रथम अनुपूरक व्यय विवरण को स्वीकृति मिली।
कुल 1038 प्रश्न मिले, जिनमें 971 स्वीकृत हुए, 206 ध्यानाकर्षण सूचनाएँ मिलीं
अध्यक्ष ने बताया कि सत्र के दौरान कुल 1038 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 971 प्रश्न स्वीकृत हुए। इन स्वीकृत 971 प्रश्नों में 74 अल्पसूचित प्रश्न थे, जिनमें 70 प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हुए। कुल 721 तारांकित प्रश्न स्वीकृत हुए, जिनमें 697 प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हुए। साथ ही, 176 प्रश्न अतारांकित हुए। लगभग सभी विभागों ने प्रश्नों के उत्तर दिए। कुल 206 ध्यानाकर्षण सूचनाएँ प्राप्त हुई, जिनमें 08 व्यक्तव्य हेतु स्वीकृत हुए, 180 सूचनाएँ लिखित उत्तर हेतु संबंधित विभागों को भेजे गये तथा 18 अमान्य हुए। इस सत्र में कुल 193 निवेदन प्राप्त हुए, जिसमें 186 स्वीकृत हुए एवं 07 अस्वीकृत हुए। कुल 119 याचिकाएँ प्राप्त हुई, जिसमें 106 स्वीकृत एवं 13 अस्वीकृत हुई। इस सत्र में कुल 100 (सौ) गैर सरकारी संकल्प की सूचना पर सदन में चर्चा हुई। सदस्यों द्वारा शून्यकाल के माध्यम से जनहित के कतिपय मामले उठाये गये एवं विभिन्न विभागों के प्रतिवेदन, अधिसूचना की प्रति तथा बिहार विधान सभा के विभिन्न समितियों के प्रतिवेदन सदन पटल पर रखे गये।
भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक का लेखापरीक्षा-सिविल सभा पटल पर रखा गया
23 जुलाई, 2026 को प्रभारी मंत्री, वित्त विभाग द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 151(2) के अनुसरण में भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक से प्राप्त बिहार सरकार का मार्च 2024 को समाप्त हुए वर्ष 2023-24 के निष्पादन एवं अनुपालन लेखापरीक्षा वर्ष 2017-18 से 2022-23 के “निष्पादन लेखापरीक्षा-सिविल” तथा वर्ष 2024-25 के “राज्य के वित्त” प्रतिवेदनों को राज्यपाल की अनुमति के आलोक में सभा पटल पर रखा गया। साथ ही इन प्रतिवेदनों को बिहार विधान सभा के लोक लेखा समिति द्वारा विचार किये जाने एवं जनता में बिक्री के लिए प्राप्य होने का प्रस्ताव सदन द्वारा स्वीकृत हुआ। इसके अलावा अन्य विभागों के भी प्रतिवेदन रखे गए।
डा. प्रेम कुमार ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की इन पंक्तियों के साथ अपने सदन में मानसून सत्र के अपने समापन भाषण की शुरुआत की :
“समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।”
वहीं, समाप्त गोस्वामी तुलसीदास की कविता –
परहित सरिस धरम नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।
और वेद की उक्ति :
“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः – से की।

फोटो कैप्शन : आज शुक्रवार 24 जुलाई को मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही देखने मुंबई की एक संस्था के स्थानीय वालंटियर विद्यार्थी बिहार विधान सभा पहुंचे। अध्यक्ष डा. प्रेम कुमार ने उनके साथ ग्रुप फोटोग्राफी कराकर उनका मनोबल बढ़ाया । इस पहल से विद्यार्थियों में संसदीय परंपरा की बेहतर समझ विकसित होगी।