-By Bhola Nath
‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादक
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विशेष स्टोरी : दूसरी किस्त
जानिए…एक करोड़ की एक बेड वाले देश के सबसे बड़े अस्पताल की जमीनी हकीकत…!!
पटना : हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी देश और बिहार के सबसे बड़े तथा प्रतिष्ठित-पटना मेडिकल कालेज एवं अस्पताल- पीएमसीएम में मरीजों को वे सुविधाएं मयस्सर नहीं हो पा रही हैं, जिनका ढोल इसका निर्माण शुरू होने के साथ ही पीटा जा रहा है। दावा तो यही किया जा रहा है कि पहले फेज में बनी PMCH की नई इमारत के दो टावर (ट्विन टावर) पूरी तरह आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस हैं। मगर, सरजमीं पर हकीकत इसके उलट है। बाहर से देखने पर तो पीएमसीएच का नया बिल्डिंग काफी शानदार बना है। मगर, ताकीद है कि लोग इसके भ्रम में ना पड़ें…वहां जाने से पहले सावधान हो जाएं… कुछ तैयारियां कर लें, वरना कई तरह की जिल्लत-जलालत झेलनी पड़े सकती है…!!
पिता नीतीश कुमार (पूर्व सीएम) की सियासी विरासत संभाल रहे निशांत कुमार के लिए भी पीएमसीएम की व्यवस्था चिंता का सबब होना चाहिए। कारण कि फिलवक्त निशांत ही सूबे के स्वास्थ्य मंत्री हैं।
मुंह चिढ़ा रहे ट्विन टावर के 55 आईसीयू बेड, पुरानी इमारत में ही चल रही व्यवस्था…
निर्माण एजेंसी (एलएंडटी) ने कार्य पूरा होने पर ट्विन टावर पीएमसीएम प्रशासन (तत्कालीन अधीक्षक डा. आईएस ठाकुर) को हैंडओवर कर दिया। इनमें अत्याधुनिक तकनीक से लैस 65 आईसीयू बेड भी हैं। बताया जाता है कि डा. ठाकुर ने इन 65 आईसीयू बेड में से 10-11 बेड किसी तरह प्रयास करके गाइनी विभाग को दिया। वहां ये चल रहे हैं, मगर, अभी भी 54-55 आईसीयू बेड चालू ही नहीं हुए हैं। इसका कारण क्या है, कोई बताने को तैयार नहीं है। जबकि इन पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं। परिणाम यह है कि मेडिसिन और सर्जरी के 18-18, न्यूरो सर्जरी के 12 और कुछ अन्य आईसीयू बेड पुराने बिल्डिंग में ही चल रहे हैं।
बिजली नहीं रहने पर गंभीर मरीजों, तिमारदारों और चिकित्सकों को भारी परेशानी…
इस कारण पुरानी इमारत के आईसीयू में भर्ती मरीजों, उनके परिजनों और चिकित्सकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पुरानी इमारत में ट्विन टावर की तरह स्ट्रांग पावर बैकअप भी नहीं है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर इनका एसी सही तरीके से भी काम नहीं करता। एसी के बिना गंभीर मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिल्लत – जलालत झेलते तिमारदारों को हाथ का बेना (पंखा) से मरीजों को हवा झलते देखा जा सकता है। सवाल यह है कि यदि मरीजों को नए आईसीयू का लाभ मिलना ही नहीं तो इतने तरद्दुद से नए स्टेट आऊ द आर्ट बिल्डिंग के नए टावर में इनको किसलिए बनवाया क्यों गया।
निशांत को पीएमसीएम समेत अन्य बड़े अस्पतालों का लेना होगा अंदर का फीडबैक…
नि:संदेह स्वास्थ्य मंत्री के नाते निशांत कुमार बिहार की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने में लगे हैं। पीएमसीएम समेत राज्य के अन्य बड़े अस्पतालों में मरीजों को मुहैया कराई जा रही सुविधाओं का वह लगातार जायजा भी ले रहे हैं। लेकिन, पीएमसीएम जैसे बड़े अस्पतालों में कहां क्या होना चाहिए, अंदर की पूरी जानकारी के लिए उनको हेल्थ सेक्टर और चिकित्सा शिक्षा के जानकारों-विशेषज्ञों की मदद उनको लेनी होगी। महज ब्यूरोक्रेटिक एप्रोच वाले लोगों के बूते काम नहीं चलने वाला। औचक दौरों के दौरान मरीजों के फडबैक से उनको ऊपर की कमियों का तो अंदाजा हो जाएगा, मगर, भीतर की गड़बड़ियां नहीं सामने आ सकेंगी।