By Bhola Nath
Ex Political Editor
HINDUSTAN, Bihar
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पटना : सीएम सम्राट के हाथों 12 दिन पहले यानी गत 12 अक्टूबर को जिन सुविधाओं का लोकार्पण कराया गया, वे अब तक अमल में नहीं आ पाई हैं…! बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री को ये अफसरान गंभीरता ने नहीं ले रहे तो फिर आम आदमी की बिसात ही क्या है…! दिलचस्प बात यह भी है कि कई सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, फिर भी उन्हें आमजन को मुहैया नहीं कराया जा रहा है…है ना हैरतअंगेज…! गौरतलब है कि जिन फैसिलिटीजी को बनाकर निर्माण एजेंसी प्रशासन को सौंप चुकी है…उसमें भी अब अल्ट्रेशन किया या रहा है…पता नहीं इसके पीछे की मंशा क्या है…? कई बड़े अखबारों में भी बिना फैक्ट चेक किए कई फर्जी दावे वाले बयान छापे जा रहे हैं।

जी हां, बात वर्ल्डक्लास पटना मेडिकल कालेज एंड हॉस्पीटल यानी PMCH की हो रही है। बिहार के इस अतिप्रतिष्ठित और पुराने मेडिकल कालेज एवं अस्पताल का पुनर्विकास किया जा रहा है। अस्पताल को 5500 करोड़ रुपए की लागत से विश्वस्तरीय का दर्जा देने की योजना पर काम चल रहा है। यह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। उनके पुत्र निशांत कुमार अभी स्वास्थ्य मंत्री हैं। गत 12 अक्टूबर को इस प्रोजेक्ट के पहले चरण के तीसरे टावर (टावर-3) का उद्घाटन और कई सेवाओं/सुविधाओं का लोकार्पण सीएम सम्राट चौधरी से कराया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ निशांत कुमार और साथ में, विभाग के सचिव कुमार रवि भी भी मौजूद थे। उस वक्त मीडिया से बातचीत में निशांत ने कहा था कि पीएमसीएच को 5,462 बेड के चिकित्सा परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मगर, अभी यहां मरीजों के लिए सेवाओं और सुविधाओं की जो हालत है, वह निशांत के बयान से उलट है।

30 रजिस्ट्रेशन काउंटर बनकर तैयार, चालू महज 4, मरीज झेल रहे फजीहत
पीएमसीएच के नवनिर्मित भवन (टावर-3, फर्स्ट फेज) में गत 12 अक्टूबर को जिन सुविधाओं का उद्घान सीएम सम्राट चौधरे ने किया, उनमें 13 ओपीडी के रजिस्ट्रेशन काउंटर भी हैं। इनमें दो काउंटर महिलाओं और एक बुजुगों व दिव्यांगों के लिए आरक्षित है। मगर, इन 13 में से मात्र 4 काउंटरों पर ही अभी रजिस्ट्रेशन शुरु हुआ है। मौके पर मीडिया से बातचीत में पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने दावा किया था कि अन्य सभी रजिस्ट्रेशन काउंटरों को एक हफ्ते में नए भवन में शिफ्ट कर उनको शुरू कर दिया जाएगा। उनके बयान के 7 नहीं 10 दिन से ज्यादा हो गए हैं, अभी तक नए भवन के सभी काउंटर चालू नहीं हुए हैं। सवाल यह है कि जब नए वातानुकूलित भवन में आधुनिक काउंटर तैयार हैं तो कम्प्यूटर आदि मशीन और स्टाफ वहां लाकर इसे शुरू करने के लिए आखिर कितना वक्त चाहिए। रिजल्ट यह है कि अधिकतर मरीज अब भी राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक स्थित पुराने काउंटरों पर ही गंदगी और बिना शेड के खुले में धूप-बारिश के जरेसाए रजिस्ट्रेशन के लिए लाइन में लगते हैं… और फजीहत झेलते हैं। आखिर एयरकंडिशन्ड नए भवन के साफ-सुथरे माहौल में बने काउंटरों पर मरीजों को रजिस्ट्रेशन की पूरी सुविधा क्यों नहीं मिल रही है। रजिस्टेशन के लिए 25 टोकन मशीनों की क्योस्क लगी हैं, मगर वे भी सभी चालू नहीं हो सकी हैं। एस्केलेटर की सुविधा भी बहाल नहीं है। लिहाजा, 4 नए काउंटर से पर्ची कटाने के बाद मरीजों को तीसरे तल पर स्थित ओपीडी तक जाने के लिए लम्बा चक्कर लगाकर लिफ्ट एक पहुंचना पड़ रहा है। क्या विडम्बना है…?

PMCH Old Registration Counter
जिस आरएसबी ब्लाक को टूटना है, वहां भी अलग से बनेंगे दवा वितरण के 13 काउंटर…!
एक ओर जहां राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक (आरएसबी) से ओटी, इमरजेंसी, न्यूरो आदि विभागों को भी नए भवन में स्थानांतरित करने की बात चल रही है, वहीं, इसी आरएसबी ब्लाक में मरीजों के लिए मेडिसिन डिस्ट्रीब्यूशन के नए काउंटर बनाए जा रहे हैं। मालूम हो कि आगे के निर्माण के लिए आरएसबी की मौजूदा इमारत को टूटना है। ऐसे में पीएमसीएच प्रशासन द्वारा वहां दवा वितरण के काउंटर बनवाना सरकारी धन के दुरुपयोग के सिवा कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। वह भी तब जबकि निर्माण एजेंसी ने टावर–3 में जो 30 से अधिक काउंटर बनाकर पीएमसीएच प्रशासन को सौंपे हैं, उनमें 13 काउंटर ओपीडी मरीजों के रजिस्ट्रेशन, 13 काउंटर आईपीडी में भर्ती मरीजों की खून जांच आदि के लिए और 4-5 काउंटर दवा वितरण के मकसद से आलरेडी तैयार हो चुके हैं। मगर ओपीडी के साथ ही, आईपीडी मरीजों के लिए खून जांच आदि की सुविधा मुहैया कराने वाले 13 काउंटर भी अभी शुरू नहीं हो सके हैं। जैसा कि पीएमसीएच अधीक्षक ने गत 12 अक्टूबर को मीडिया को बताया कि ओपीडी वाले मरीजों के लिए राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक के पास दवा वितरण केंद्र बनाया जा रहा है। यहां इसके 13 काउंटर होंगे। मगर, सवाल उठता है कि यह क्यों…जबकि पहले से दवा वितरण काउंटर बने हुए हैं…! उम्मीद थी कि पीएमसीएच में मरीजों को अब पर्ची कटवाने के लिए लंबी लाइन में नहीं लगना होगा, उसे सरजमीं पर उतरने में अभी देर है। यही नहीं मरीजों को दवा लेने के लिए पुराने आरएसबी ब्लाक के पास ही दौड़ना होगा। नए बने सभी काउंटर यदि पूरी क्षमता से काम करें तो रोजाना पांच हजार मरीजों का पंजीकरण आसानी से हो सकता है। यही नहीं मेडिसिन काउंटर चालू हो जाएं तो मरीजों को दवा लेने में भी आसानी होगी…!

PMCH IPD Counter
अब तक बने कुल 1550 बेड ही, दावे 2500 पर आधुनिक इलाज के…!
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा पीएमसीएच पुनर्विकास योजना के पहले चरण के तहत नवनिर्मित टावर-3 के उद्घाटन के साथ ही अब इस अस्पताल में 536 बेड की वृद्धि हो गई है। हालांकि, अस्पताल अधीक्षक डा. राजीव कुमार सिंह का मीडिया को यह बयान देना कि अब पीएमसीएच में 2500 बेड पर मरीजों का आधुनिक सुविधाओं के साथ इलाज होगा, विरोधाभासी है। हम जब पीएमसीएच के नए प्रोजेक्ट के तहत बन रहे कुल बेडों के गणित पर गौर करते हैं तो सच्चाई सामने आ जाती है। यहां कुल 5,462 बेड बनने हैं। इनमें फर्स्ट फेज के तीन टावरों को मिलाकर अब तक लगभग 1550 बेड (टावर -3 के 536 बेड समेत) ही तैयार हुए हैं। ऐसे में 2500 बेडों पर मरीजों का आधुनिक सुविधाओं के साथ इलाज होगा, काल्पनिक बयान लगता है। अधीक्षक महोदय का बयान शायद पुरानी बिल्डिंग की इमरजेंसी, न्यूरो, आर्थो आदि के 300 और आरएसबी के 400 बेड को जोड़कर दिया गया लगता है। मगर, वहां इलाज की यदि आधुनिक सुविधाएं ही होतीं तो नया भवन बनाने या कहें पीएमसीएच के पुनर्विकास के जरूरत ही क्या थी…! वहां कैसी व्यवस्था है, सभी जानते हैं। वैसे भी नए पीएमसीएम में कुल बने 1550 बेडों में यदि इन 700 को जोड़ भी दें तो यह संख्या 2250 ही होती है। यानी 2500 में एक-दो नहीं, बल्कि 250 बेड फिर भी कम ही पड़ेंगे। गौरतलब है कि अधीक्षक के हवाले से बिहार के सभी बड़े अखबारों में भी यही खबर आई (एक में तो लीड की सुर्खी बनी) कि पीएमसीएच में 2500 बेडों पर अब आधुनिक इलाज शुरू होगा। लेकिन, किसी भी अखबार ने इस फैक्ट को हकीकत की कसौटी पर चेक करने की जरूरत नहीं समझी।

इन सुविधाओं को लेकर भी दिए जा रहे विरोधाभासी बयान…हश्र पहले जैसा ही न हो…!
इस तरह के विरोधाभासी बयान नए पीएमसीएच भवन में तैयार कई अन्य सुविधाओं को शुरू करने को लेकर भी दिए जा रहे हैं। इन नई सुविधाएं के शुरू करने की जानकारी सीएम को भी दी गई है। मगर, ये दावे कब तक अमल में आएंगे… आएंगे भी या नहीं यह देखना होगा…!! वैसे इन दावों की हकीकत और फसाना अलग अलग है… इसे आप खुद भी पीएमसीएच जाकर देख-महसूस कर सकते हैं) :
- गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मुहैया कराने के लिए ट्रायज (गंभीरता के आधाकर पर मरीजों को ग्रीन, येलो और रेड में चिन्हित करना) इसी माह नए भवन में शिफ्ट करने की बात आई है, हालांकि इसका दावा अधीक्षक महोदय लगभग दो माह से कर रहे हैं…!
- ऑर्थोपीडिक (हड्डी रोग), न्यूरो, मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विभाग के लिए अलग-अलग केबिन बनाए गए हैं…गंभीर मरीजों की जरूरत के अनुसार संबंधित विभागों के डॉक्टर सीधे ट्रायज में ही उपलब्ध रहेंगे।
- घायल गंभीर मरीजों के लिए पहला एक घंटा (गोल्डन आयर) बेहद नाजुक होता है… इस दौरान त्वरित इलाज इलाज शुरू किए जाने की बात है,,, ऐसा हो तो जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।
- पीएमसीएच में रोजाना 50-60 मरीज ट्रायज में आते हैं, जिनमें 50% से ज्यादा दूसरे अस्पतालों से रेफर होते हैं…विभागों के आपसी समन्वय से मरीजों को बिना देरी इलाज मुहैया कराने की बात आई है…!