पटना : आपके लोकप्रिय न्यूज पोर्टल BRBJ News की खबर का बड़ा असर हुआ है…! करोड़ों की नई मशीनों से विश्वस्तरीय पटना मेडिकल कालेज एवं अस्पताल यानी PMCH में अब और सस्ते में होगी दो महंगी जांच…!! MRI और सीटी (CAT) स्कैन के लिए PMCH को जल्द मिलेंगे दो दर्जन टेक्निशियन…! स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर इसका टेंडर निकल गया है…! आज यानी Wednesday (14 October) को निविदा भरने का अंतिम दिन है…! बस एक दिन बाद शुक्रवार को इसका टेंडर खुलेगा…!
गौरतलब है कि 5400 बेड की बन रही वर्ल्ड क्लास PMCH में चल रहीं कई तरह की उलटबांसियों और मरीजों की परेशानियों को ध्यान में रखकर BRBJ News पर अलग-अलग मुद्दों पर 7 किस्तों में खबरें चलाई गईं थीं। इसीकी सातवीं कड़ी में गत 18 अक्टूबर को हमने करोड़ों की लागत वाली अत्याधुनिक एमआरआई और सीटी या कहें कैट मशीनों के इंस्टॉल होने के बाद भी इनके धूल खाने यानी इस्तेमाल नहीं होने का मुद्दा उठाया था। इनकी जगह निजी कंपनी द्वारा कदरन काफी पुरानी मशीनों से महंगी दर पर मरीजों की जांच हो रही थी।
BRBJ News पर यह खबर चलने के अगले ही दिन यानी 19 अक्टूबर को पीएमसीएच अस्पताल प्रशासन को इस पर ध्यान गया… और उसकी ओर से 24 टेक्निशियन को आउटसोर्स के आधार पर सेवा मुहैया कराने के लिए टेंडर निकाल दिया गया। इसके लिए प्रतिष्ठित, अनुभवी और आर्थिक रूप से सक्षम एजेंसियों से टेंडर अप्लाई करने के लिए कहा गया है। आज यानी 14 अक्टूबर को टेंडर अप्लाई करने का अंतिम दिन है। वहीं, एक दिन बाद 16 अक्टूबर यानी शुक्रवार को 12.30 बजे तकनीकी निविदा खोली जाएगी। इसके लिए प्री बिड बैठक गत 30 सितम्बर को पीएमसीएम अधीक्षक के सेल में हो चुकी है।

एक साल से इंस्टॉल होकर धूल खा रहीं लेटेस्ट एमआरआई व सीटी स्कैन मशीनें…
पीएमसीएच की नई इमरजेंसी के ग्राउंड फ्लोर पर अत्याधुनिक वसर्न की ये दोनों मशीनें (एमआरआई की Siemens MAGNETOM Vida और सीटी स्कैन के लिए Siemens SOMATOM go.Top-256-Slice) पिछले साल अक्टूबर में ही इंस्टॉल भी हो चुकी हैं। इनके इंस्टालेशन और शील्डिंग पर भी 50 लाख से 1 करोड़ रुपए का खर्च आता है। वहीं, सालाना मेनटेनेंस मशीन की कीमत का 10 से 15 फीसदी होता है। लेकिन, अब तक दोनों मशीनें फंक्शन में नहीं आ पाईं हैं। अलबत्ता मेनटेनेंस का पैसा सरकार के खजाने से अलग से चला गया।
यह भी ध्यान देने लायक है कि दोनों लेटेस्ट मशीनों की वारंटी-गारंटी भी बिना इनके चालू हुए ही लगभग एक साल का खत्म हो गया है। इन दोनों मशीनों की कीमत लगभग 9 से 10 करोड़ रुपए है। इनकी तुलना में पीपीपी मोड में अभी जिन दोनों मशीनों (एमआरआई और सीटी स्कैन) से जांच हो रही है वे 10 साल से अधिक पुरानी और काफी कम गुणवत्ता है। पुरानी मशीनों से जांच की स्थिति में मर्ज की पूरी रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। वैसे अभी भी इन दोनों महंगी जांचों की व्यवस्था पीपीपी मोड में होने के कारण मरीजों की जगह किसी कंपनी/एजेंसी/व्यक्ति को आर्थिक लाभ हो रहा है। बताया जाता है कि जिस पीपीपी मोड वाली बाहरी फर्म से ये महंगी जांचें कराई जा रही हैं, उसका कांट्रैक्ट भी खत्म हो गया है।

मैनपावर की कमी से नहीं संचालित हो पा रहीं अत्याधुनिक मशीनें…
पीएमसीएच के पास अपने मैनपावर (मानवबल) यानी टेक्निशियन-हेल्पर की कमी के कारण ये मशीनों के संचालित नहीं हो पा रही हैं। दोनों मशीनों को 8-8 घंटे की तीन शिफ्टों में चलाने के लिए पीएमसीएच अस्पताल प्रशासन की ओर से 24 टेक्निशियन को आउटसोर्स के आधार पर सेवा मुहैया कराने के लिए टेंडर निकाला गया है। इसके लिए प्रतिष्ठित, अनुभवी और आर्थिक रूप से सक्षम एजेंसियों से टेंडर अप्लाई करने के लिए कहा गया है। एजेंसी की संविदा अवधि 2 वर्ष होगी, जिसे और एक साल के लिए विस्तारित किया जा सकता है। सीटी स्कैन तकनिशियन के लिए बीएससी रेडियोग्राफी / DMRIT और एमआरआई तकनिशियन के लिए बीएससी एमआरआई प्रोद्योगिकी / बीएससी रेडियोग्राफी+ एमआरआई का अनुभव और दोनों के लिए न्यूनतम 3 वर्ष का कम-से-कम 60 बिस्तर क्षमता के अस्पताल में व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए। निविदादाता को निविदा के साथ प्रतिभूति राशि के रूप में 2 लाख रुपए का ड्राफ्ट अधीक्षक, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना के पक्ष में देना होगा। वहीं, प्रति तकनीशियन की पारिश्रमिक 31,150 रुपए होगी। यह EPF नियोक्ता अंशदान 1,950 रुपए सहित होगी। वहीं, प्रथम वर्ष के लिए 29, 200 रुपए नियत और फिर 5% वार्षिक वृदि होगी।

मरीजों के जांच शुल्क का 65 से 70 फीसदी खुद निजी फर्म ले रही…
जानकारी के मुताबिक राज्य स्वास्थ्य समिति से कांट्रैक्ट के तहत पीपीपी मोड वाली कंपनी अभी मरीजों से वसूले जाने वाले जांच शुल्क का सीटी स्कैन में 70 फीसदी और एमआरआई में 65 फीसदी खुद ले लेती है और मात्र 30 से 35 फीसदी ही पीएमसीएच को देती है, जबकि निजी फर्म के टेक्निशियन और बिजली का खर्च छोड़ दें तो डाक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, जगह, पानी सब अस्पताल का होता है। एक एमआरआई में 40 से 60 मिनट और एक सीटी स्कैन में 20 से 25 मिनट के हिसाब से एक दिन में लगभग 30 से 25 एमआरआई और 40 से 50 सीटी स्कैन यानी कुल 70 से 75 हो पाता है।
पीएमसीएच अपनी व्यवस्था करे तो काफी अधिक राशि उसे मिले…
खर्च के गणित पर गौर करें तो एक टेक्निशियन की सैलरी पर 31,150 रुपए खर्च होगा। इस तरह 24 के लिए महीने का कुल 7.50 लाख रुपए खर्च होगा, जबकि मरीजों से औसत 2000 रुपए जांच शुल्क की दर से 1.40 लाख रुपए प्रतिदिन और मासिक 42 लाख होगी, जो स्टाफ पर खर्च की तुलना में लगभग लगभग 6 गुनी होगी। इस तरह यदि पीएमसीएच अपनी व्यवस्था हो जाती है तो यह जांच दर लगभग 15 से 20 फीसदी और कम हो सकती है। इसका सीधा लाभ गरीब मरीजों को मिल सकता है। मालूम हो कि एमआरआई का बाहर (प्राइवेट) में रेट 3000 से 15000 रुपए और सीटी स्कैन का 2000 से 10 हजार रुपए होता है।
चंद्रशेखर सिंह के पटना आयुक्त रहते एम्स रेट पर जांच का निर्णय
चंद्रशेखर सिंह के पटना आयुक्त रहते लिए गए निर्णय के तहत अभी एम्स, पटना की रेट पर जांच हो रही है। जो बाजार दर से लगभग आधी है। यदि, पीएमसीएच अपनी जांच शुरू करता है तो मरीजों और 15-20 फीसदी और लाभ हो सकता है। साथ ही, रिपोर्ट की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। पीएमसीएच में सीटी स्कैन की सूची में 71 तरह की जांच शामिल हैं। यहां एमआरआई की रेट लिस्ट में सामान्य एमआरआई जैसे-एमआरआई एंकल प्लेन, सर्वाइकल स्पाइन प्लेन, लुंबोसैक्रल स्पाइन प्लेन, पेट, श्रोणी और विभिन्न अंगों की प्लेन जांच की दर 3,500 रुपये है। वहीं, कांट्रास्ट वाली कई एमआरआई जांच की दर 5,500 रुपये है। इसमें ब्रेन ट्यूमर प्रोटोकाल, पिट्यूटरी प्रोटोकाल, क्रेनियल नर्व इवैल्यूएशन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस प्रोटोकाल, एब्डोमेन तथा कई अन्य विशेष जांच शामिल हैं।