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भाजपा के संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद और SIS ग्रुप के संस्थापक – चेयरमैन आरकेसिन्हा का निधन, नोएडा आवास पर ली अंतिम सांस… अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर पटना के अन्नपूर्णा भवन (पाटलिपुत्र) लाया गया…शोक संवेदनाओं का तांता…  

माननीयों की ‘लॉबी’ में पहुंची पटना के नामी स्वीट शॉप की खट्टी मिठाई…! पहली बाइट के साथ ही बिगड़ा सियसतदानों का जायका…!! पिछले दो माह से राज्यभर में 531 प्रतिष्ठानों की जांच और कार्रवाई के बाद भी यह हाल…! …यानी जिसका पूंछ उठाओ, वही….

हाल में बिहार के चार बड़ी शख्सियतों की तबियत नासाज हुई…! ये सभी कहां गए…? …तो जवाब है, एक निजी हॉस्पिटल में…! इनमें किसी को भी बिहार सरकार द्वारा शिद्दत से बनाए जा रहे एक्सीलेंट PMCH की याद शायद नहीं आई…! याद आई भी हो तो उन्हें PMCH में अपने लायक चिकित्सकीय और दूसरी सुविधाओं को लेकर संशय हो…! आप कहेंगे कि माननीय हैं…जहां मर्जी होगी, इलाज या चेकअप करा सकते हैं…! लेकिन, BRBJ News का बड़ा सवाल यह है कि फिर पटना मेडिकल कालेज एवं हॉस्पिटल यानी PMCH को 5,500 करोड़ रुपए की लागत से वर्ल्ड क्लास बनाने की जरूरत क्या है…?  कुछ लोग इसके लिए ‘गोईंठा में घी सुखाने’ की मसल इस्तेमाल करें तो क्या इसे गलत माना जाए…!

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BRBJ News > एजुकेशन > काम की खबरें > वर्ल्डक्लास हॉस्पिटल में करोड़ों की लेटेस्ट एमआरआई और सीटी स्कैन की मशीनें धूल खा रहीं…और महंगी जांच में लुट रहे मरीज…!! (हकीकत…) डाक्टर, स्पेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी सब पीएमसीएच का और (फसाना…) लाभ पहुंचाया जा रहा निजी फर्म को…!! पीपीपी मोड से मरीजों को जमकर लग रहा चूना…!!
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वर्ल्डक्लास हॉस्पिटल में करोड़ों की लेटेस्ट एमआरआई और सीटी स्कैन की मशीनें धूल खा रहीं…और महंगी जांच में लुट रहे मरीज…!! (हकीकत…) डाक्टर, स्पेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी सब पीएमसीएच का और (फसाना…) लाभ पहुंचाया जा रहा निजी फर्म को…!! पीपीपी मोड से मरीजों को जमकर लग रहा चूना…!!

By BRBJ Desk
Published: September 18, 2026
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– By Bhola Nath

‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादक

संपर्क : 9431044800 (मोबाइल नम्बर)

विशेष स्टोरी : सातवीं किस्त

पटना। वर्ल्ड क्लास कहे जाने वाले हॉस्पिटल में भी मरीज एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी महंगी जांच कराने में लुट रहे हैं…! हकीकत…यह है कि डाक्टर, स्पेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी सब पीएमसीएच का अपना खर्च हो रहा है और फसाना…यह कि इसका लाभ मिल रहा निजी फर्म को…!! यानी पीपीपी मोड से मरीजों को जमकर चूना लगाया जा रहा है…!! वहीं, करोड़ों की लागत से खरीदकर आई इनकी दोनों लेटेस्ट मशीनें यहां इंस्टॉल होकर धूल खा रही हैं…!! इनका लाभ क्रिटिकल मरीजों को नहीं मिल रहा है…!!

What's inside ?
– By Bhola Nath‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादकसंपर्क : 9431044800 (मोबाइल नम्बर)विशेष स्टोरी : सातवीं किस्त10 साल पुरानी मशीनों से अभी हो रहा एमआरआई और सीटी स्कैनगंभीर इंज्यूरी या ट्रॉमा की स्थिति में मरीज की जान का एक-एक क्षण कीमतीएक साल से इंस्टॉल हो धूल खा रहीं करोडों की लेटेस्ट एमआरआई व सीटी स्कैन मशीनेंमैनपावर की कमी से नहीं संचालित हो पा रहीं अत्याधुनिक मशीनेंमरीजों के जांच शुल्क का 65 से 70 फीसदी खुद निजी फर्म ले लेती हैपीएमसीएच अपनी व्यवस्था करे तो चार गुनी राशि उसे मिले…चंद्रशेखर सिंह के पटना आयुक्त रहते एम्स रेट पर जांच का हुआ निर्णयनिजी फर्म पर जांच शुल्क के पीएमसीएच के हिस्से का करोड़ से अधिक बकाया…जारी…(अगली किस्त में विश्वस्तरीय पीएमसीएम की कुछ और फैसिलिटीज की पड़ताल …!!!)

10 साल पुरानी मशीनों से अभी हो रहा एमआरआई और सीटी स्कैन

फिलहाल विश्वस्तरीय पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी पीएमसीएच में पीपीपी मोड में लगीं 10 साल से अधिक पुरानी मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) और सीटी स्कैन (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) या कैट स्कैन (कंप्यूटेड एक्सियल टोमोग्राफी) मशीन से मरीजों की जांच हो रही है। इसका खामियाजा मरीजों को यह भुगतना पड़ रहा है कि उनको जांच की क्वालिटी तो स्तरीय नहीं ही मिल पा रही है, साथ ही, जांच रिपोर्ट भी 15 से 20 दिनों में मिल रही है। इसके कारण मरीजोन का सही इलाज नहीं हो पाता।

गंभीर इंज्यूरी या ट्रॉमा की स्थिति में मरीज की जान का एक-एक क्षण कीमती

यहां गौरतलब है कि गंभीर इंज्यूरी या ट्रॉमा की स्थिति में मरीज की जान का एक-एक क्षण कीमती होता है। देर से जांच रिपोर्ट आने के कारण चिकित्सकों के पास कोई चारा नहीं होता। सिवा इसके कि वे अंदाज पर इलाज करें। बुलेट (गोली) से घायल किसी मरीज के इलाज या क्रिटिकल इंज्यूरी के मामलों में डाक्टर रिस्क नहीं लेते और मरीज को बाहर जांच कराने के लिए भेज देते हैं। वैसे, 5-10 फीसदी ही ऐसे मरीज होते हैं जो बाहर की महंगी जांच अफोर्ड कर सकते हैं और उनके लिए खर्च करना कोई खास मायने नहीं रखता। लेकिन, गरीब-वंचित वर्ग के लोगों के लिए इस तरह की महंगी जांच के लिए हजारों रुपए का खर्च वहन करना मुश्किल होता है और उनके गंभीर मरीज सही इलाज के बिना दम तोड़ देते हैं।

एक साल से इंस्टॉल हो धूल खा रहीं करोडों की लेटेस्ट एमआरआई व सीटी स्कैन मशीनें

हकीकत यह है कि पीएमसीएच की नई इमरजेंसी के ग्राउंड फ्लोर पर अत्याधुनिक वसर्न की दोनों मशीनों पिछले साल अक्टूबर में ही इंस्टॉल भी हो चुकी हैं। इनके इंस्टालेशन और शील्डिंग पर भी 50 लाख से 1 करोड़ रुपए का खर्च आता है। वहीं, सालाना मेनटेनेंस मशीन की कीमत का 10 से 15 फीसदी होता है। लेकिन, आज तक दोनों मशीनें फंक्शन में नहीं आ पाईं। पीएमसीएच में एमआरआई की जो अत्याधुनिक मशीन 3 टेस्ला (3टी) है, उसकी कीमत 8 करोड़ से 15 करोड़ रुपए होती है। वहीं, यहां लगी सीटी स्कैन की 256 स्लाइस वाली मशीन की कीमत 3 से 5 करोड़ रुपए है। इससे बारीक से बारीक (अति सूक्ष्म) इमेजिंग की तस्वीरें देखी और उतारी जा सकती हैं। इनकी तुलना में पीपीपी मोड में अभी जिन दोनों मशीनों (एमआरआई और सीटी स्कैन) से जांच हो रही है वे 10 साल से अधिक पुरानी हैं। पीएमसीएच की नई मशीनों (एमआरआई के लिए 3टी और 256 स्लाइस वाली सीटी स्कैन) की तुलना में इसकी गुणवत्ता काफी कम है। पुरानी मशीनों से जांच की स्थिति में मर्ज की पूरी रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। यहां यह भी ध्यान देने लायक है कि दोनों लेटेस्ट मशीनों की वारंटी-गारंटी भी बिना इनके चालू हुए ही लगभग एक साल का खत्म हो गया है।

मैनपावर की कमी से नहीं संचालित हो पा रहीं अत्याधुनिक मशीनें

अब जरा पीएमसीएच की व्यवस्था समझते हैं। इसके पास मशीनों को चलाने के लिए अपने मैनपावर यानी टेक्निशियन-हेल्पर की कमी है। दोनों मशीनों को तीन शिफ्ट में चलाने के लिए चार-चार (एक रिजर्व) टेक्निशियन चाहिए। वहीं, एक टेक्निशियन पर 4 हेल्पर पर चाहिए। इस तरह पीएमसीएच में दोनों मशीनों के लिए कुल 8 टेक्निशियन एवं 32 हेल्पर चाहिए। अस्पताल प्रशासन चाहे तो इन्हें आउटसोर्स भी कर सकता है। काफी लिखा-पढ़ी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बीएमएसआईसीएल को इसकी व्यवस्था करने के लिए कहा। लेकिन, बाद में उसने अस्पताल को ही इसका इंतजाम करने के लिए कह दिया। फिर भी पता नहीं क्यों, मैनपावर का इंतजाम नहीं हो पा रहा। वैसे अभी भी इन दोनों महंगी जांचों की व्यवस्था पीपीपी मोड में होने के कारण मरीजों की जगह किसी कंपनी/व्यक्ति को आर्थिक लाभ हो रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि फिर क्यों बाहरी फर्म से ये महंगी जांचें कराई जा रही हैं। सूत्रों ने बताया कि वह भी तब जबकि पीपीपी मोड वाली कंपनी का कांट्रैक्ट खत्म हो गया है।

मरीजों के जांच शुल्क का 65 से 70 फीसदी खुद निजी फर्म ले लेती है

बताया गया कि राज्य स्वास्थ्य समिति से कांट्रैक्ट के तहत पीपीपी मोड वाली कंपनी मरीजों से वसूले जाने वाले जांच शुल्क का सीटी स्कैन में 70 फीसदी और एमआरआई में 65 फीसदी खुद ले लेती है और मात्र 30 से 35 फीसदी ही पीएमसीएच को देती है, जबकि निजी फर्म के टेक्निशियन और बिजली का खर्च छोड़ दें तो डाक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, जगह, पानी सब अस्पताल का होता है। एक एमआरआई में 40 से 60 मिनट और एक सीटी स्कैन में 20 से 25 मिनट के हिसाब से एक दिन में लगभग 30 से 25 एमआरआई और 40 से 50 सीटी स्कैन यानी कुल 70 से 75 हो पाता है। कांट्रैक्ट की शर्तों के तहत जांच शुल्क की कमाई का बड़ा हिस्सा निजी फर्म को चला जाता है।

पीएमसीएच अपनी व्यवस्था करे तो चार गुनी राशि उसे मिले…

अब जरा खर्च का हिसाब समझते हैं। एक टेक्निशियन की सैलरी आमतौर पर 40 से 50 हजार रुपए होती है। यानी कुल 8 के लिए महीने का लगभग 3.20 से 4 लाख रुपए खर्च होगा। वहीं, एक हेल्पर को 20 से 25 हजार रुपए देना होगा। एक टेक्निशियन पर 4 के हिसाब से 32 हेल्पर चाहिए। इन पर महीने का लगभग 6.5 लाख से 8 लाख रुपए का खर्च आएगा। इस तरह देखा जाए तो मैनपावर पर मासिक खर्च लगभग 9.5 से 12 लाख रुपए आएगा, जबकि मरीजों से दोनों मशीनों से औसत 2000 रुपए जांच शुल्क की दर से 1.40 लाख रुपए प्रतिदिन और मासिक 42 लाख रुपए मिलेंगे, जो स्टाफ पर खर्च की तुलना में लगभग चार गुनी होगी। इस तरह यदि पीएमसीएच अपनी व्यवस्था करे तो यह जांच दर लगभग 15 से 20 फीसदी और कम हो सकती है। इसका सीधा लाभ गरीब मरीजों को मिल सकता है। मालूम हो कि एमआरआई का बाहर (प्राइवेट) में रेट 3000 से 15000 रुपए और सीटी स्कैन का 2000 से 10 हजार रुपए होता है।

चंद्रशेखर सिंह के पटना आयुक्त रहते एम्स रेट पर जांच का हुआ निर्णय

चंद्रशेखर सिंह के पटना आयुक्त रहते लिए गए निर्णय के तहत अभी एम्स, पटना की रेट पर जांच हो रही है। जो बाजार दर से लगभग आधी है। यदि, पीएमसीएच अपनी जांच शुरू कर दे तो मरीजों और 15-20 फीसदी और लाभ हो सकता है। साथ ही, रिपोर्ट की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। वैसे नए आयुक्त के निर्णय के तहत यह जांच एम्स, पटना की तुलना में 25 फीसदी और रियायत देने की बात हो रही है। गौरतलब है कि पटना आयुक्त ही पीएमसीएच रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन होते हैं। पीएमसीएच में सीटी स्कैन की सूची में 71 तरह की जांच शामिल हैं। वहीं, यहां एमआरआई की रेट लिस्ट में सामान्य एमआरआई जैसे-एमआरआई एंकल प्लेन, सर्वाइकल स्पाइन प्लेन, लुंबोसैक्रल स्पाइन प्लेन, पेट, श्रोणी और विभिन्न अंगों की प्लेन जांच की दर 3,500 रुपये है। वहीं, कांट्रास्ट वाली कई एमआरआई जांच की दर 5,500 रुपये है। इसमें ब्रेन ट्यूमर प्रोटोकाल, पिट्यूटरी प्रोटोकाल, क्रेनियल नर्व इवैल्यूएशन, मल्टीपल स्क्लेरोसिस प्रोटोकाल, एब्डोमेन तथा कई अन्य विशेष जांच शामिल हैं।

निजी फर्म पर जांच शुल्क के पीएमसीएच के हिस्से का करोड़ से अधिक बकाया

राज्य स्वास्थ्य समिति से मिली जानकारी के मुताबिक पीपीपी मोड वाली कंपनी को मरीजों से लिए गए जांच शुल्क को 40वें दिन पीएमसीएच प्रशासन के हिस्से की राशि राज्य स्वास्थ्य समिति में जमा करना पड़ता है। लेकिन, यह रकम नियमानुसार और तय समय पर जमा नहीं हो पाता है। इसके लिए पीएमसीएच प्रशासन को बार-बार पत्र लिखना पड़ता है। इसको लेकर ऑडिट आब्जेक्शन भी हो चुका है। काफी दबाव पर अभी हाल में फर्म ने 45 लाख रुपए राज्य स्वास्थ्य समिति में जमा किए हैं। बताया गया कि इसके बावजूद एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि उसके पास बकाया है। राज्य स्वास्थ्य समिति से यह पैसा फिर पीएमसीएच की रोगी कल्याण समिति में आता है। अभी पीएमसेएच के रोगी कल्याण कोष में 25 करोड़ रुपए जमा हैं। अस्पताल प्रशासन यह राशि मरीजों के इलाज एवं आकस्मिक स्थिति में खर्च करता है।

…जारी…

(अगली किस्त में विश्वस्तरीय पीएमसीएम की कुछ और फैसिलिटीज की पड़ताल …!!!)

TAGGED:world class#PMCH#MRI#CT Scan#Machine

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October 23, 2026

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