– By Bhola Nath, Ex Political Editor
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Exclusive Story
पटना : हाल में बिहार की चार बड़ी शख्सियतों की तबियत नासाज हुई…! ये सभी कहां गए…? एक निजी हॉस्पिटल में…! इनमें किसी को भी बिहार सरकार द्वारा बनाए जा रहे एक्सीलेंट PMCH की याद शायद नहीं आई…! याद आई भी हो तो उन्हें PMCH में अपने लायक चिकित्सकीय और दूसरी सुविधाओं को लेकर संभवत: संशय रहा हो…! आप कहेंगे कि माननीय हैं…जहां मर्जी होगी, इलाज या चेकअप करा सकते हैं…! लेकिन, BRBJ News का बड़ा सवाल यह है कि फिर पटना मेडिकल कालेज एवं हॉस्पिटल यानी PMCH को 5,500 करोड़ रुपए की लागत से वर्ल्ड क्लास बनाने की जरूरत क्या है…? कुछलोग इसके लिए ‘गोईंठा में घी सुखाने’ की मसल इस्तेमाल करें तो क्या इसे गलत माना जाए…! नीरज कुमार…बिहार में सत्तारूढ़ जदयू के एमएलसी…हाल ही में हाईप्रोफाइल पटना स्नातक सीट के चुनाव प्रचार के अंतिम समय में उनकी तबियत बिगड़ी…तो दाखिल कहां हुए… एक निजी हॉस्पिटल में…! इससे कुछ दिन पहले बिहार सरकार में मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा की तबियत बिगड़ी तो वे भी वहीं भर्ती हुए…! सोडियम की कमी से राज्य सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव की सेहत खराब हुई तो वे भी उसी निजी हॉस्पिटल में गए…! इसी तरह, केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी रूटीन चेकअप कराने एक अन्य निजी हॉस्पीटल में गए…! बिहार की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान PMCH से इन सभी हस्तियों की बेरूखी, क्या सरकार की उस महत्वाकांक्षी परियोजना को मुंह नहीं चिढ़ा रहा, जिसके तहत हजारों करोड़ रुपए खर्च करके पीएमसीएच को विश्वस्तरीय और उत्कृष्ट बनाने का स्वप्न देखा जा रहा है…!

क्या PMCH पर माननीय का भरोसा नहीं…‘गोईंठा में घी सुखाने’ की मसल चर्चा में…!
अब आप कहेंगे कि माननीय हैं, वीवीआईपीज हैं, अपनी मर्जी और सुविधानुसार जहां चाहे इलाज या चेकअप कराने जा सकते हैं…! इसमें बड़ी बात क्या है…! लेकिन, BRBJ News का बड़ा सवाल यह है कि फिर पटना मेडिकल कालेज एवं हॉस्पिटल यानी PMCH को 5,500 करोड़ रुपए की लागत से वर्ल्ड क्लास बनाए जाने की जरूरत क्या है…? ऐसे में कुछलोग इसके लिए ‘गोईंठा में घी सुखाने’ की मसल इस्तेमाल करें तो क्या इसे गलत माना जाए…! सवाल यह भी है कि क्या पीएमसीएच के डाक्टरों के इलाज पर इन वीवीआईपीज मरीजों को भरोसा नहीं है…!! याद कीजिए एक समय PMCH के चिकित्सकों की काबिलियत की गूंज देश –विदेश में थी…! फिर अब क्या हुआ…!! क्या सुविधाओं में कुछ कमी है…?? तो जवाब है, हां, यह एक बड़ी वजह हो सकती है…!
एक साल से 56 प्राइवेट, डीलक्स और सुपर डीलक्स रूम तैयार, मगर चालू नहीं…!
पीएमसीएच में साधन संपन्न लोगों, वीआईपीज और वीवीआईपीज के लिए विशिष्ट कक्ष की सेवाएं अब भी शुरू नहीं हो सकी हैं…! अलबत्ता इस पर लगभग सौ करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं…! गौरतलब है कि पुनर्विकास योजना के तहत PMCH में 5500 करोड़ रुपए खर्चकर 5,462 बेड का निर्माण होना है। यानी एक बेड की लागत 1 करोड़ रुपए से अधिक…! यहां ध्यान देने लायक है कि वीआईपीज और वीवीआईपीज के लिए 56 रूम बन चुके हैं, बल्कि निर्माण एजेंसी ने इनको हैंडओवर भी कर दिया है और एक साल पहले पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने इनका उद्घाटन भी कर दिया है…!! ये रूम चूंकि विशिष्ट सुविधाओं से लैस बनाए गए हैं, इसलिए इन पर लागत एक करोड़ से अधिक आया है…! मगर, PMCH प्रशासन उन्हें अब तक चालू नहीं कर सका है…! यदि कोई वीवीआईपी मरीज आएगा तो अपने लिए वीवीआईपी सुविधाएं भी खोजेगा, जो कि यहां है, मगर अमल में नहीं है…! ऐसे में कोई वीवीआईपीज या बेहतर इलाज और फैसिलिटीज का मुंतसिर मरीज क्यों आएगा…?? गत 12 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने PMCH में पहले चरण के 3rd Tower और उसकी कई सुविधाओं का उद्घाटन किया था। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार भी मौजूद थे। गौरतलब है कि एक पखवाड़ा पहले जिन सुविधाओं की शुरुआत सीएम सम्राट चौधरी ने की थी, उनमें भी अधिकतर अभी शुरू नहीं हो सकी हैं…!

वीआईपी मरीजों को मयस्सर नहीं हो पा रही रूम की सुविधा…
अभी पीएमसीएम में 44 प्राइवेट रूम और 10 डीलक्स सुईट्स तैयार हैं। प्राइवेट रूम सिंगल, जबकि डीलक्स सुईट डबल रूम के हैं। सीएम और गवर्नर के लिए पांच तारा सुविधाओं वाले दो सुपर डीलक्स रूम भी अलग से हैं। वहीं, सभी फेज को मिलाकर नए पीएमसीएच में कुल 146 प्राइवेट रूम बनने हैं। किराए की बात करें तो एक डीलक्स सुईट के 4000 रुपए और प्रति प्राइवेट रूम 1500 रुपए है। वहीं, प्राइवेट हॉस्पिटल्स में इस तरह के डीलक्स सुईट का किराया कम से कम तीन गुना यानी 12 से 15 हजार और प्राइवेट सिंगल रूम के 5 से 6 हजार रुपए हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सभी तरह के मिलाकर ये 56 प्राइवेट रूम/सूट पिछले एक साल यानी सितम्बर, 2025 से ही तैयार हैं, मगर अभी तक ये चालू नहीं हुए हैं। काफी कोशिशों के बाद भी वीआईपी मरीजों को भी यह सुविधा नहीं मिल रही है…!

क्या निजी अस्पतालों के दबाव में प्राइवेट रूम व डीलक्स सुईट चालू नहीं हो रहे…!
लोग सवाल यह भी उठा रहे हैं कि क्या निजी अस्पतालों के दबाव में ये प्राइवेट रूम व डीलक्स सुईट चालू नहीं हो रहे …! इस सुविधा के फंक्शनल नहीं होने की वजह से कई वैसे मरीज जिनको इस सुविधा की दरकार रहती है और अफोर्ड कर सकते हैं, वे सिर्फ इसी वजह से निजी नर्सिंग होम या अस्पतालों का रुख कर लेते हैं। दूसरी ओर, इस कारण पीएमसीएम या कहें सरकार को भी राजस्व की क्षति हो रही है। अब जरा गौर करें, कोई वीवीआईपीज या साधान सम्पन्न मरीज बिना प्राइवेट रूम की सुविधा के यहां क्यों आएगा…? फिर सवाल यह भी उछाला जा रहा है कि हजारों करोड़ खर्च करके पीएमसीएच का रीडेवलपमेंट क्यों किया जा रहा है…? इसे विश्वस्तरीय, एक्सीलेंट आदि तमगों से क्यों नवाजा जा रहा है…!!

PMCH के चिकित्सकों की कुशलता, अनुभव और काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह…!
वीवीआईपीज मरीजों द्वारा निजी अस्पतालों में इलाज कराने को तवज्जो देना क्या PMCH के चिकित्सकों की कुशलता, अनुभव और काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह खड़ा नहीं करता है…!! यह भी ध्यान देने लायक है कि मेदांता में नीरज कुमार और भगवान सिंह कुशवाहा दोनों को देखने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गए…! PMCH नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है…! संभव है तब उनके भी मन में हजारों करोड़ खर्च कर बनाई जारी PMCH की उपयोगिता को लेकर प्रश्न तैरा हो…! मगर, वह भी तो अपने नेत्र का इलाज कराने के लिए दिल्ली का रुख करते रहे हैं…! ऐसे में पीएमसीएच पर इतनी भारी भरकम राशि के खर्च का जस्टिफिकेशन जनता ही करे तो बेहतर है…! आपका क्या कहना है…!