– By Bhola Nath
‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादक
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विशेष स्टोरी : पांचवीं किस्त
पटना : भव्य-वर्ल्ड क्लास और एस्टेट-आफ- द-आर्ट वाले नए पटना मेडिकल कालेज और अस्पताल यानी पीएमसीएच में परिकल्पना के लिहाज से तो कोई कसर नहीं छोड़ी गई है…! पहले फेज के इसके फर्स्ट टावर में महामहिम गवर्नर साहब…और माननीय मुख्यमंत्री जी के लिए भी करोड़ों की लागत से दो सुपर डीलक्स सुईट्स बने हुए हैं….!! तमाम अत्याधुनिक मेडिकल फैसिलिटीज से लैस…!! दो-दो बेडरूम के इन सुईट्स में सोफायुक्त बेहतरीन बेडरूम, शानदार विजिटर्स रूम, लांज, बड़ा किचन और सामने आकर्षक गंगा व्यू का दीदार…! यही नहीं, दोनों माननीय के लिए बने दोनों सुपर डीलक्स सुईट्स के लिए दो सिक्युरिटी रूम एवं कॉमनली डेडिकेटेड डाक्टर व नर्स के लिए अलग-अलग रूम और सेपरेट नर्सिंग स्टेशन भी है। निर्माण पूरा होने के साथ ही दोनों विशाल-भव्य सुईट्स को मेनटेन किया जा रहा है…! स्टाफ का मानना है कि पीएमसीएच में रौनक तभी आएगी जब महानुभावों के कदम पड़ें। काश…!!! कभी रूटीन चेकअप के बहाने ही सही चरण रज गिराने अपने सुईट्स में आएं….!! ये आएं तो आम मरीजों के यहां इलाज की चिकित्सकीय सुविधाएं भी खुद ब खुद दुरुस्त हो जाएं…!!!

नीतीश जी की माताजी का आरएसबी के सर्जरी डिपार्टमेंट में हुआ था आपरेशन…
पीएमसीएच का महत्व और प्रतिष्ठा पहले से दशक पहले से कायम है। गौरतलब है कि नीतीश कुमार जब बिहार के मुख्यमंत्री थे तब उनकी माता जी और वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की दादी जी का हार्निया का आपरेशन पीएमसीएच के ही राजेन्द्र सर्जिकल ब्लाक (आरएसबी) के सर्जरी डिपार्टमेंट में डा. आरएन सिंह की यूनिट में हुआ था। यह एक दशक से अधिक पहले की बात है। तब आईएएस अधिकारी चंचल कुमार स्वास्थ्य विभाग के हेड थे। तब आरएसबी के ही एक रूम को एसी वगैरह लगाकर अपग्रेट कर पोस्ट ऑपरेटिव रूम बनाया गया था। ऑपरेशन के बाद नीतीश कुमार जी की माता जी को वहां रखा गया था। जब तक वे वहां रहीं, न सिर्फ नीतीश जी बल्कि उनके काबिना के कई मंत्री, नेता और अफसर वहां आते रहे थे।
विश्वस्तरीय पीएमसीएच में इलाज की सुविधा भी वैसी ही मिलनी चाहिए…
वैसे भी केवल बिल्डिंग के एस्टेट-ऑफ-द-आर्ट और विश्वस्तरीय होने से कुछ नहीं होता, मरीजों को इलाज की सुविधा भी वैसी ही मिलनी चाहिए…!! गवर्नर-सीएम के लिए बने दो सुपर डीलक्स का जायजा लेने जब सत्ता प्रतिष्ठान के शीर्ष शख्सियत आते हैं तो व्यवस्थाएं अपने आप सुधरने लगती हैं। कारण कि इनके आने की सूचना मात्र से ही सारा सिस्टम रिवैम्प हो जाता है। गौरतलब है कि पीएमसीएच के 10 डीलक्स या 55 प्राइवेट रूम में न सिर्फ पैसे वाले बल्कि रसूख वाले वीआईपी मरीज आएंगे, बल्कि इनके रहने से ही अस्पताल की व्यवस्था भी 24 घंटे चौकस रहेगी। डाक्टर, नर्स, टीचर सब बिल्कुल मुस्तैद…! पीएमसीएम में रौनक…! ये वैसे लोग हैं, जो अपने लिए विशेष सुविधा के एवज में भुगतान के लिए तैयार रहते हैं। अगर विशेष सुविधा नहीं मिली तो ये निजी अस्पतालों का रुख कर लेते हैं। यदि प्राइवेट (प्रति रूम किराया 1500 रुपए) और डीलक्स (किराया 4000 रुपए प्रति रूम) रूमों का आवंटन शुरू हो तो पीएमसीएच प्रशासन को नियमित आय भी शुरू होगी।

वीवीआईपी मरीज आएं तो डाक्टर, नर्स और स्टाफ सब चौकस रहेंगे…
शाम को अभी सीनियर डाक्टर की गश्त की व्यवस्था नहीं है। गत 8 सितम्बर को स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने पीएमसीएच के अपने दौरे के दौरान डाक्टरों से खास तौर से दो बार राउंड (सुबह और शाम की गश्त) के लिए ताकीद की। यह नहीं, उन्होंने डाक्टरों से सुबह 9 से शाम पांच बजे तक अनिवार्य रूप से ड्यूटी में तैनात रहने के लिए भी कहा। उनके इस निर्देश का कितना और कब तक असर रहेगा, कहना मुहाल है, मगर यदि 65 डीलक्स और प्राइवेट रूम अलॉट होने शुरू हो जाएं और वीवीआईपी मरीज/उनके परिजन यहां आने शुरू हो जाएं, तो सिस्टम में सुधार फौरन से पेश्तर हो सकता है। ठीक वैसे ही, जैसे यह मुद्दा उठ रहा है कि यदि वीआईपीज के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने लगें तो वहां की व्यवस्था अपने आप सुधर जाए। मंत्री, विधायक, सांसद, आलाधिकारी यदि अपना इलाज कराने पीएमसीएच में आने लगें तो यहां की व्यवस्था भी सुधरते देर नहीं लगेगी। शाम की नियमित गश्त शुरू हो जाएगी। तब चिकित्सक, नर्स, कर्मी सबको रहना पड़ेगा। वरिष्ठ चिकित्सकों को भी शाम को अपनी निजी क्लीनिक या नर्सिंग होम का मोह छोड़ना पड़ेगा। दलालों की भी चांदी नहीं रहेगी।


स्वास्थ्य मंत्री निशांत को भी मरीजों ने इलाज की खामियों को लेकर ही घेरा…
हाल में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार जब भी पीएमसीएम, डीएमसीएम या किसी बड़े अस्पताल में विजिट पर गए तो मरीजों ने उनको वहां के इलाज की खामियों को लेकर ही घेरा। यह खुला सत्य है कि इन बड़े अस्पतालों में दकई कारणों से सीनियर डाक्टर शाम को गायब रहते हैं और मरीज भगवान भरोसे…! ऐसे में आशंका है कि कहीं 5,544 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा इतना भव्य और विश्वस्तरीय पीएमसीएम महज वंचितों और बीपीएल मरीजों का अस्पताल बनकर रह जाए। इन मरीजों को या तो दलाल यहीं के डाक्टरों के निजी क्लीनिक में बरगलाकर पहुंचा देते हैं, या फिर जो मरीज आर्थिक रूप से समर्थ नहीं होते हैं, उनको बिना इलाज के ही भगा दिया जाता है। ऐसी कई घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं…!!