– By Bhola Nath
‘हिन्दुस्तान’ के पूर्व राजनीतिक संपादक
संपर्क : 9431044800 (मोबाइल नम्बर)
विशेष स्टोरी : चौथी किस्त
BRBJ News की विशेष स्टोरी की तीन किस्तों के बाद आया पीएमसीएच अधीक्षक का पक्ष…! गिनाई परेशानियां…लेकिन, आसानी से दूर हो सकती हैं ये दिक्कतें…आप भी जानिए कैसे…!!
पटना : BRBJ News की विशेष स्टोरी की तीन किस्तों के बाद पीएमसीएच के मौजूदा अधीक्षक डा. राजीव कुमार सिंह का पक्ष आया है…! खास बात यह रही कि उन्होंने BRBJ News की स्टोरीज को लेकर ऐसा कुछ नहीं कहा, कि इसमें कोई भी फैक्ट गलत लिखा गया है। उन्होंने व्वस्थागत, व्यावहारिक और प्रशासनिक परेशानियां गिनाते हुए तर्क पेश किया कि क्यों अभी पीएमसीएच की व्यवस्था पूरी तरह काम नहीं कर पा रही है। सिस्टम में झोल कहां और किस वजह से है? इसके बावजूद हमारा मानना है कि कोई नई व्यवस्था लागू करने के लिए मजबूत Will Power दिखानी पड़ती है। पीएमसीएच एडमिनिस्ट्रेशन का मुखिया होने नाते यदि वे इच्छाशिक्त दिखाएं और इन कुछ एडजस्टमेंट का सहारा लें तो स्थिति में आसानी से सुधार हो सकता है।
एक रूम में एक से अधिक शिक्षक क्यों नहीं एडजस्ट हो सकते…?
प्राइवेट रूम फंक्शनल नहीं होने के बारे में मौजूदा अधीक्षक का कहना है कि चिकित्सकों-शिक्षकों के बैठने के लिए जगह नहीं थी, लिहाजा लगभग 10 प्राइवेट रूम उनको दे दिए गए हैं। हालांकि, प्रबंधकीय हेड होने के नाते उनकी जानकारी में भी यह होना चाहिए कि पहले टावर के सातवें माले पर मेडिकल शिक्षकों के बैठने के लिए व्यवस्था है। इसी तरह गाइनी, आई (नेत्र) आदि विभागों में भी मौजूद व्यवस्था के तहत उनके लिए सीटिंग एरेंजमेंट की जा सकती है। जरूरी नहीं कि एक रूम में एक ही चिकित्सक/शिक्षक बैठें। पुरानी बिल्डिंग या नए टावर के गाइनी, मेडिसिन जैसे कुछ विभागों की तरह थोड़ा एडजस्टमेंट से एक कक्ष में दो-तीन या चार डाक्टर/शिक्षक को बैठाया जा सकता है। यानी उनकी सीटिंग रिएरेंज की जा सकती है।

पीएमसीएच की नई बिल्डिंग के विभाग…
डाक्टरों को 10 प्राइवेट रूम दे दिए, पर बचे 45 मरीजों को क्यों नहीं मिल रहे…
चलिए, मान लिए कि बहुत दिक्कत है और इसलिए 10 प्राइवेट रूम चिकित्सकों/शिक्षकों को दे दिए। फिर भी आईसीयू बेड वाले ऐसे 35 प्राइवेट और 10 डीलक्स सुईट्स यानी कुल 45 रूम बचते हैं। आखिर वे मरीजों को क्यों नहीं अलॉट किए जा रहे हैं। प्राइवेट और डीलक्स रूम अगर अलाट किए जाते हैं तो इसका लाभ न सिर्फ मरीजों को मिलेगा, बल्कि पीएमसीएच या कहें सरकार को भी आय होगी। यहां गौरतलब है कि जो मरीज अफोर्ड कर सकते हैं, वे प्राइवेट या डीलक्स रूम में ही रहना चाहते हैं। कहीं और नहीं…! वैसे, पुरानी इमारत में भी वीआईपी मरीजों के लिए व्यवस्था थी। इनमें 30 कॉटेज, गाइनी विभाग के 15 केबिन और कैंसर विभाग के 10 कमरे यानी कुल 55 कमरे ऐसे थे, जिनका इस्तेमाल वीआईपीज ट्रीटमेंट के लिए किया जाता था। तब यह व्यवस्था कैसे स्मूथ चल रही थी। इस पर गौर करना चाहिए…!
कई बार व्यवस्था बनाने से बनती है…
नीकू-पीकू वार्ड और कुछ अन्य विभागों को नए टावर में शिफ्ट करते समय भी इसी तरह की परेशानियां आई थीं। तब पीएमसीएच के अधीक्षक डा. आईएस ठाकुर थे। निर्माण एजेंसी से नीकू-पीकू के लिए सिर्फ तीन ही वेंटिलेटर मुहैया कराए गए थे, जबकि होने चाहिए 18…! बताया जाता है कि पीडिएट्रिक के तत्कालीन हेड ऑफ डिपार्टमेंट डा. भूपेन्द्र कुमार ने 15 से 18 वेंटिलेकर की मांग की थी। नहीं मिले तो उस वक्त पुराने वार्ड से 9 वेंटिलेटर लाकर कुल 12 वेंटिलेटर से नए भवन में नीकू-पीकू वार्ड को चालू किया गया। इसी तरह मरीजों की संख्या और सुविधा के लिहाज से गाइनी और मेडिसिन को दो पार्ट कर उसमें कुछ दूसरे विभाग चालू किए गए। एक सवाल यह भी उठ सकता है कि आईसीयू वाले विभाग बिना चिकित्सक/ शिक्षक चालू कैसे शिफ्ट किए जा सकते हैं, तो यहां ध्यान देने लायक है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से 20 से अधिक आईसीयू के जानकार डाक्टरों की बहाली की गई है, उनके जरिए आईसीयू को भी नए टावर में शिफ्ट कर उसे फंक्शनल किया जा सकता है।

नई बिल्डिंग के आईसीयू …
गैप एनालिसिस के आधार पर निर्माण एजेंसी से नए इक्विपमेंट की डिमांड जरूर करें…
यहां यह भी गौरतलब है कि जो भी नए विभाग नई बिल्डिंग में शिफ्ट हों, उनके लिए निर्माण एजेंसी से नए इक्विपमेंट भी जरूर ले लिए जाएं। आखिर वर्ल्ड क्लास अस्पताल के लिए इक्विपमेंट भी तो उसी स्तर के होने चाहिए। पीडिएट्रिक, आई (नेत्र), गाइनी आदि के लिए भी गैप एनालिसिस (अंतर का आकलन) कर वर्तमान अधीक्षक को निर्माण एजेंसी से डिमांड करनी चाहिए। वैसे भी एक बार पुराने उपकरण से काम शुरू होने के बाद न तो इसका रिकार्ड रहता है और न ही नए के मिलने की गारंटी रह जाती है। गौरतलब है कि राज्य सरकार से किए गए एग्रीमेंट के तहत निर्माण एजेंसी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) को 750 करोड़ रुपए के इक्विपमेंट भी पीएमसीएच के नए भवन को मुहैया कराने हैं।
अभी भी नए पीएमसीएच में बेडों की संख्या पुराने की तुलना में खास कम नहीं…
अधीक्षक महोदय का कहना है कि सितम्बर के अंत तक तीसरा टावर मिल जाएगा। तब इसके 500 नए शैय्या को मिलाकर हमारे पास कुल 1550 बेड होंगे। उनका दावा है कि अगला टावर (थर्ड वाला) निर्माण एजेंसी के हैंडओवर करने पर सर्जरी विभाग इसी माह नए में शिफ्ट हो जाएगा। हालांकि, न्यूरो, आईसीयू मेडिसिन, आर्थो, न्यूरो और बर्न वार्ड अभी पुराने में ही रहेंगे। वे कहते हैं कि थर्ड टावर मिलने पर कई व्यवस्थाओं में सुधर की उम्मीद है। वैसे मौजूदा दो टावर में उपलब्ध बेडों की संख्या का आकलन करें तो यह भी कम नहीं है। मसलन, पुराना पीएमसीएच 1750 बेड का है, चूंकि राजेन्द्र सर्जिकल ब्लॉक (आरएसबी) अभी उसीमें रहेगा, इसलिए यदि उसके 400 बेड फिलहाल छोड़ दें तो 1350 बेड बचते हैं। इस तरह नई बिल्डिंग के दो टावर में उपलब्ध 1050 बेडों से यह सिर्फ 300 कम हैं। वहीं, थर्ड टावर के 500 जोड़ देने पर यह संख्या 1550 बेड की हो जाएगी, जो पीएमसीएच के पुराने स्ट्रेंथ के लगभग बराबर होगी। डा. सिंह को उम्मीद है कि अगले साल जून, 27 तक चौथा टावर भी मिल जाएगा। हालांकि निर्माण की प्रगति को देखते हुए जानकार इसमें अभी देर बता रहे हैं। वैसे फर्स्ट फेज के चारों टावर तैयार होने के बाद कुल मिलाकर 2200 बेड होंगे। इनमें पहले दो टावर के 1050, तीसरे टावर के 500 और चौथे टावर (अभी निर्माणाधान) के 650 बेड शामिल हैं।