भोला नाथ
पटना : बिहार के शिक्षकों में समायोजन/अधिशेष से जुड़ी नियमावली और इसको लेकर कुछ दिनों पहले जारी मानक संचालन प्रक्रिया यानी (SOP) के प्रति भारी नाराजगी दिख रही है। राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा तैयार एसओपी के तहत जो शिक्षक पहले से स्कूल में पदस्थापित हैं, उन्हें अधिशेष शिक्षक के रूप में माना गया है। वहीं, वैसे शिक्षक जिनकी बिना किसी वेकेंसी या पद के बाद में पोस्टिंग की गई है, उन्हें पदस्थापित स्कूल में ही रहने दिया जा रहा है। समायोजन की इस प्रक्रिया से हजारों की संख्या में शिक्षक परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि किसी स्कूल में पहल से किसी विषय के पद पर शिक्षक नियुक्त हैं और फिर भी जिन शिक्षकों को बिना रिक्ति वहां तैनाती कर दी गई है, तो विभाग पहले उन्हें अधिशेष मानते हुए उस स्कूल से हटाए और जिस विद्यालय में पद खाली है, वहां पदस्थापित करे। ना कि पहले से नियमानुसार पदस्थापित शिक्षकों को जबरन स्थानांतरण करने की तैयारी की जाए।
पहले से तैनात संस्कृत शिक्षकों को हटाकर नए आए उर्दू शिक्षकों को रखेंगे
इसी तरह किसी हाईस्कूल में मानक के अनुरूप अब 8 शिक्षक होंगे। इसके तहर भाषा विषय में तीन यानी – हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत के एक -एक शिक्षक पदस्थापित हैं। लेकिन, टीआर – 3 में कई हाईस्कूल में बिना रिक्ति व पद के उर्दू के शिक्षकों को पदस्थापित कर दिया गया है। वहीं, कई स्कूलों में मैथिली के शिक्षकों को भी पदस्थापित कर दिया गया है। उलटबांसी यह कि इसका खामियाजा अब पहले से पदस्थापित संस्कृत के शिक्षक को भुगतना पड़ेगा। भारतीय संस्कृति से जुड़ी सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत के गुरुजी को ही अब अधिशेष शिक्षक के रूप में दिखाने की तैयारी है। यानी उनका जबरन तबादला होगा। इससे कई हाईस्कूलों में संस्कृत की पढ़ाई भी प्रभावित होगी। राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति की दुहाई देने वाली मौजूदा ङबल इंजन की सरकार के लिए क्या यह चिंता की बात नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि जरूरत के अनुरूप उर्दू शिक्षक रखे जाने चाहिए, मगर पहले उनके लिए पद तो सृजित हो।
तबादला चाहने वाले सुरक्षित और नहीं चाहने वालों से मांगे 30 स्कूल का विकल्प
यह भी गौरतलब है कि जिन शिक्षकों को स्थानांतरण चाहिए उनको भी समायोजन/अधिशेष शिक्षक के तहत सुरक्षित कर दिया गया है। वहीं, जिन शिक्षकों को स्थानांतरण नहीं चाहिए उसे इस प्रक्रिया के तहत जबरदस्ती 30 स्कूल का विकल्प देने के लिए कहकर हटाने की तैयारी हो रही है। यह भी ध्यान देने लायक है कि किसी स्कूल के एक पद पर पहले से शिक्षक नियुक्त है, पद रिक्त नहीं है, इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने उसी विषय में किसी जगह एक, किसी जगह दो और कहीं-कहीं तीन शिक्षक नियुक्त कर दिये हैं। शिक्षकों का कहना है कि यह कहां से न्याय संगत है कि जिन शिक्षकों को शिक्षा विभाग की गलती या कहें मनमानी से बिना वेकेंसी नियुक्त कर दिया गया, उनको उसी स्कूल में रहने दिया जाएगा।
अजब-गजब : पुरुषों का गृह प्रखंड में तबादला नहीं, लेकिन, पहले वाले वहीं रहेंगे
वहीं, इस नियमावली के तबादला प्रावधान के तहत पुरुष शिक्षकों का स्थानांतरण उनके गृह प्रखंड में नहीं हो सकेगा। लेकिन, पहले से गृह प्रखंड में नियुक्त शिक्षक वहीं रहेंगे। शिक्षकों का सवाल है कि क्या यह भेदभाव नहीं है? अन्यायपूर्ण नहीं है? शिक्षा विभाग को इस पर भी विचार करना चाहिए कि मौजूदा हालात के मद्देनजर हाईस्कूल (9वीं-दसवीं कक्षा के लिए) में छात्र-शिक्षक अनुपात की जगह विषयवार शिक्षक की जरूरत है। इनमें – विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी और अतिरिक्त विषय में संगीत/गृह विज्ञान, यानी ये सात विषय के शिक्षक किसी भी हाईस्कूल में अनिवार्य रूप से होने चाहिए ही चाहिए।
विधान पार्षद ने भी पत्र लिख त्रुटियों की ओर दिलाया ध्यान, संशोधन की मांग की
शिक्षक नेता सह विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी ने इस मुद्दे पर गत 27 जुलाई को शिक्षा विभाग को पत्र भी भेजा है। इसमें उनका कहना है कि एक ओर राज्य सरकार सभी शिक्षकों को प्रखंडों में पदस्थापित करने के लिए स्थानांतरण का संकल्प जता रही है, वहीं, गत 21 जुलाई, 26 को बिहार विधानसभा में शिक्षा मंत्री द्वारा बताया गया कि राज्य में 63,074 शिक्षक सरप्लस हैं। अब सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब राज्य में कार्यरत शिक्षकों की संख्या सरप्लस है, तो फिर बिना रिक्ति के इनका स्थानांतरण कहां किया जाएगा? इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में सरप्लस शिक्षकों की बहाली कैसे कर दी गई? इनके पदों की स्वीकृति देने वाले पदाधिकारी कौन हैं और ऐसे सरप्लस शिक्षकों के वेतन भुगतान के रूप में लोक धन की जो विपुल राशि का व्यय हो रहा है, उसके लिए जिम्मेवार कौन हैं और उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? पत्र में उन्होंने गत 21 जुलाई को तबादले को लेकर जारी की गई एसओपी में कई बड़ी त्रुटियों का जिक्र करते हुए इसमें संशोधन की मांग की है।