पटना : बिहार विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बीपीएससी की परीक्षा केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं है, बल्कि यह समाज और राज्य की सेवा का द्वार है। आज मंगलवार 14 जुलाई को वह बिहार विधान सभा के विस्तारित भवन में एक संगठन द्वारा ‘70वीं बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के सम्मान में आयोजित समारोह में बोल रहे थे।
इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, बिहार विधान परिषद् के उप सभापति डॉ. रामवचन राय एवं बिहार विधान सभा के उपाध्यक्ष नरेन्द्र नारायण यादव ने भी अपने विचार रखे।
प्रयासरत युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी आपकी सफलता : स्पीकर
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि आप सभी ने कठिन परिश्रम, आत्मविश्वास और धैर्य के बल पर यह मुकाम प्राप्त किया है। आपकी सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी जो अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। आप अब ऐसे दायित्वपूर्ण पदों पर कार्य करेंगे जहाँ आपके प्रत्येक निर्णय का प्रभाव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा। इसलिए आपका चरित्र, आपकी ईमानदारी, आपकी संवेदनशीलता और आपकी कार्यकुशलता ही आपकी सबसे बड़ी पहचान होगी।
अधिकारी की सबसे बड़ी शक्ति पद नहीं, बल्कि निष्पक्षता, ईमानदारी और जनसेवा
अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने सभी चयनित अभ्यर्थियों से अपील की कि वे संविधान के मूल्यों, विधि के शासन तथा जनहित को सदैव सर्वोपरि रखें। हमारा संविधान हमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का मार्ग दिखाता है। एक लोकसेवक के रूप में आपका पहला दायित्व इन संवैधानिक आदर्शों को व्यवहार में उतारना है। प्रशासन केवल नियमों का पालन कराने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को मजबूत करने का दायित्व भी है। आपके कार्य से लोगों के जीवन में बदलाव आए, इसकी चेष्टा करें। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की सबसे बड़ी शक्ति उसका पद नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्षता, ईमानदारी और जनसेवा का भाव होता है। सदैव यह स्मरण रखें कि प्रशासन का अंतिम उद्देश्य जनता के जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है।